CIA का फर्जी एजेंट बनकर अरबों डॉलर की डिफेंस डील हड़पने की कोशिश, भारतीय मूल के गौरव श्रीवास्तव की खुली पोल
अंतरराष्ट्रीय रक्षा सौदों और खुफिया एजेंसियों के नाम पर धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने जकार्ता से लेकर वॉशिंगटन तक हड़कंप मचा दिया है। भारतीय मूल के बिजनेसमैन गौरव श्रीवास्तव पर आरोप लगा है कि उन्होंने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) का गुप्त एजेंट बताकर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो से नजदीकियां बढ़ाईं। ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) की एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार, श्रीवास्तव ने इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल इंडोनेशियाई सरकार से फाइटर जेट और अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों की अरबों डॉलर की डिफेंस डील हासिल करने के लिए किया था।
फोन कॉल से हुआ पर्दाफाश और अदालती मुकदमों में बड़े खुलासे
इस पूरी अंतरराष्ट्रीय साजिश की पोल तब खुली जब गौरव श्रीवास्तव के पूर्व बिजनेस पार्टनर नील्स ट्रोस्ट ने कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अदालतों में मुकदमे दायर किए। इन मुकदमों और रिकॉर्ड की गई फोन कॉलों के आधार पर दावा किया गया है कि श्रीवास्तव ने खुद को रसूखदार CIA ऑपरेटिव बताकर इंडोनेशिया के वरिष्ठ अधिकारियों और तत्कालीन रक्षा मंत्री (अब राष्ट्रपति) प्राबोवो सुबियांतो तक सीधी पहुंच बनाई। वे वर्ष 2020 में वॉशिंगटन डीसी और जकार्ता में हुई हाई-लेवल डिफेंस मीटिंग्स में भी शामिल होने में कामयाब रहे, जहां सैन्य साजो-सामान की खरीद पर बड़ी चर्चाएं हुई थीं।
शेल कंपनियों के जरिए 13.9 बिलियन डॉलर के F-15 फाइटर जेट्स का जाल
अपनी इस फर्जी साख के दम पर श्रीवास्तव ने साल 2020 से 2022 के बीच अपनी चार कंपनियों के जरिए इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय से पांच शुरुआती रक्षा समझौते, 'लेटर ऑफ इंटेंशन' और एक MoU हासिल कर लिए। इन प्रस्तावित सौदों में 36 F-15 फाइटर जेट, UH-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर, C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और एक जॉइंट कमांड सेंटर की आपूर्ति शामिल थी, जिसकी कुल अनुमानित कीमत करीब 13.9 बिलियन डॉलर (लगभग 1.15 लाख करोड़ रुपये) थी। हालांकि, बाद में कॉर्पोरेट जांच में खुलासा हुआ कि ये चारों कंपनियां महज 'शेल एंटिटीज' (कागजी कंपनियां) थीं, जिन्हें डिफेंस सेक्टर का कोई अनुभव नहीं था और टैक्स न भरने के कारण इनका रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया गया था। राहत की बात यह रही कि इंडोनेशियाई सरकार ने इनके तहत कोई वास्तविक भुगतान या खरीद नहीं की।
राष्ट्रपति के भाई से नजदीकी और 51 मिलियन डॉलर के लोन का खेल
अदालती शिकायतों के मुताबिक, गौरव श्रीवास्तव ने केवल सरकारी अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि इंडोनेशिया के सबसे प्रभावशाली व्यापारियों को भी अपने जाल में फंसाया। उन्होंने राष्ट्रपति प्राबोवो के भाई और अरसारी ग्रुप के चेयरमैन हाशिम जोजोहादिकुसुमो से गहरी नजदीकियां बनाईं। श्रीवास्तव के कथित रसूख के झांसे में आकर उनके पार्टनर ट्रोस्ट ने अपनी कंपनी की 50% हिस्सेदारी उनके नाम कर दी, जिसके बाद श्रीवास्तव ने उस कंपनी से अरसारी ग्रुप को 51 मिलियन डॉलर का लोन भी दिलवा दिया। दूसरी तरफ, गौरव श्रीवास्तव ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने पूर्व पार्टनर द्वारा मनगढ़ंत कहानी बताया है।