स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों से वसूला जाएगा भारी टैक्स, क्या भारत को ईरान से मिलेगी विशेष छूट
वैश्विक व्यापार और कच्चे तेल की सप्लाई चेन के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर नियंत्रण रखने वाले देशों द्वारा अब यहां से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों और तेल टैंकरों पर एक नया पारगमन शुल्क (Transit Tax) लगाने की तैयारी की जा रही है। इस फैसले के बाद पूरी दुनिया के नीति निर्माताओं और व्यापारिक घरानों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस रूट से दुनिया का एक-तिहाई से अधिक कच्चा तेल ले जाया जाता है। वैश्विक बाजार में इस कदम को कुछ एक्सपर्ट्स कूटनीतिक दबाव बनाने के एक नए तरीके के रूप में देख रहे हैं।
ईरान के करीबियों को मिल सकती है बड़ी राहत, वैश्विक बाजार पर पड़ेगा सीधा असर
इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर ईरान का खासा प्रभाव है और यह नया टैक्स सीधे तौर पर उन देशों को प्रभावित करेगा जो खाड़ी देशों से तेल का आयात करते हैं। कूटनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि इस नए नियम के तहत ईरान के करीबी और मित्र देशों को टैक्स में भारी रियायत या पूरी छूट दी जा सकती है। पश्चिम एशिया (Middle East Geopolitics) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच इस कदम को पश्चिमी देशों और उनके सहयोगियों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में लॉजिस्टिक्स और शिपिंग की लागत काफी ज्यादा बढ़ सकती है।
भारत के रणनीतिक और व्यापारिक हितों पर क्या होगा असर?
नई दिल्ली के लिए यह खबर बेहद संवेदनशील है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रूट के जरिए आयात करता है। चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) के विकास और ईरान के साथ भारत के पुराने ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंधों को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को इस टैक्स से छूट नहीं मिलती है, तो देश में पेट्रोल-डीजल और माल ढुलाई की कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि, नई दिल्ली को पूरी उम्मीद है कि ईरान के साथ उसके मजबूत द्विपक्षीय रिश्ते भारत को इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचाने में मददगार साबित होंगे।