चांद से टकराएगा एलन मस्क का 4500 किलो का 'भटका दैत्य', अंतरिक्ष में मचेगी भारी खलबली; क्या धरती से दिखेगा यह खौफनाक मंशा
ब्रह्मांड और अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया से इस वक्त एक बेहद हैरान और रोमांचित करने वाली खबर सामने आ रही है। अंतरिक्ष में सालों से चक्कर काट रहा करीब 4,500 किलोग्राम का एक विशालकाय मानव निर्मित कचरा, जिसे वैज्ञानिक 'भटका दैत्य' (Rogue Space Junk) कह रहे हैं, अब सीधे चंद्रमा की ओर बढ़ रहा है। यह भारी-भरकम टुकड़ा किसी और का नहीं, बल्कि अरबपति एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) द्वारा सालों पहले लॉन्च किए गए एक रॉकेट का हिस्सा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस लावारिस बूस्टर रॉकेट की चांद से सीधी और भीषण टक्कर होने वाली है, जिसने दुनिया भर के खगोलविदों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
कैसे एक स्पेस मिशन का हिस्सा बन गया चांद का 'दुश्मन'
यह पूरी कहानी साल 2015 से शुरू होती है, जब एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने डीप स्पेस क्लाइमेट ऑब्जर्वेटरी (DSCOVR) उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजने के लिए अपने फाल्कन 9 (Falcon 9) रॉकेट को लॉन्च किया था। मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद इस रॉकेट का दूसरा चरण (बूस्टर) पृथ्वी और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के बीच फंस गया। ईंधन खत्म हो जाने के कारण यह पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गया और पिछले 11 सालों से अंतरिक्ष की गहराइयों में एक लावारिस भूत की तरह भटक रहा था। अब गुरुत्वाकर्षण के खेल ने इसे सीधे चांद के रास्ते पर धकेल दिया है।
कितनी खतरनाक होगी यह टक्कर और कितनी रफ्तार से गिरेगा यह दैत्य
नासा (NASA) और दुनिया भर के स्वतंत्र अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने इस कचरे के पथ की सटीक गणना की है। उनके अनुसार, यह 4500 किलो का ढांचा करीब 9,300 किलोमीटर प्रति घंटे (लगभग 2.6 किलोमीटर प्रति सेकंड) की अत्यंत तीव्र और विनाशकारी रफ्तार से चंद्रमा की सतह से टकराएगा। इस भीषण टक्कर के कारण चांद की जमीन पर एक बहुत बड़ा गड्ढा (Crater) बन जाएगा और वहां की धूल और चट्टानें अंतरिक्ष में सैकड़ों किलोमीटर ऊपर तक उछलेंगी। वैज्ञानिक इस बात को लेकर बेहद उत्सुक हैं कि इस प्रभाव से चंद्रमा की भूगर्भीय संरचना के बारे में कुछ नए रहस्य सामने आ सकते हैं।
क्या भारत या दुनिया के किसी हिस्से से लाइव देखी जा सकेगी यह महा-टक्कर
अंतरिक्ष प्रेमियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे इस ऐतिहासिक घटना को अपनी नग्न आंखों या घरेलू दूरबीन से देख पाएंगे? खगोलविदों ने साफ किया है कि यह टक्कर चंद्रमा के उस हिस्से पर होने जा रही है जो हमेशा पृथ्वी से दूर रहता है, जिसे 'फार साइड ऑफ द मून' (Far Side of the Moon) या चांद का अंधेरा हिस्सा कहा जाता है। इस वजह से पृथ्वी पर मौजूद किसी भी टेलिस्कोप से इसे लाइव देखना नामुमकिन होगा। हालांकि, चांद की परिक्रमा कर रहे नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) और भारत के चंद्रयान जैसे अंतरिक्ष यान इस टक्कर के बाद बनने वाले नए गड्ढे और उसके मलबे की तस्वीरें जरूर खींच सकेंगे, जो बाद में जारी की जाएंगी।