आसिम मुनीर को मिली असीमित सैन्य ताकत: क्या पाकिस्तान में अघोषित मार्शल लॉ की हो चुकी है शुरुआत
आर्थिक तंगी, भुखमरी और गुलाम कश्मीर में सुलगते विद्रोह के बीच पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य ढांचे में एक बहुत बड़ा बदलाव किया गया है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने हाल ही में 'डिफेंस फोर्सेस ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026' और 'नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2010' में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस नए घटनाक्रम के साथ ही पाकिस्तान के छोटे से इतिहास में यह पहली बार होने जा रहा है कि देश की पूरी सैन्य और रणनीतिक कमान की असीमित ताकत केवल एक ही व्यक्ति—फील्ड मार्शल आसिम मुनीर—के हाथों में केंद्रित हो गई है।
जानिए आसिम मुनीर को क्या-क्या मिली है बेलगाम ताकत?
पाकिस्तान के इस नए डिफेंस लॉ के लागू होने के बाद जनरल आसिम मुनीर अब थल सेना, नौसेना और वायुसेना के सर्वोच्च सर्वेसर्वा बन चुके हैं। प्रशासनिक भाषा में इसे 'यूनाइटेड कमांड' कहा जा सकता है, जिसके तहत अब तीनों सेनाएं सीधे तौर पर एक केंद्रीय मुख्यालय के अधीन आ गई हैं और इसके मुखिया खुद मुनीर हैं।
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बर्खास्तगी और भर्ती के असीमित अधिकार: नए संशोधनों के तहत मुनीर को सैन्य अधिकारियों और कर्मियों को सेवा से हटाने, सेवानिवृत्त करने, त्यागपत्र स्वीकार या अस्वीकार करने तथा उम्र की सीमा में बदलाव करने तक के व्यापक अधिकार मिल गए हैं।
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परमाणु हथियारों की कमान: यह बदलाव केवल पारंपरिक सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के परमाणु शस्त्रागार को भी इसके दायरे में लाया गया है। 27वें संविधान संशोधन के तहत सृজিত 'कमांडर ऑफ द नेशनल स्ट्रेटेजिक कमांड' (CNSC) पद के जरिए अब पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के संचालन को भी इस नए फौजी ढांचे के अंतर्गत कानूनी जामा पहना दिया गया है।
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सरकार पर सीधा नियंत्रण: मुनीर अब सिर्फ सेना प्रमुख नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा मामलों पर प्रधानमंत्री के मुख्य सैन्य सलाहकार भी बन गए हैं, जिससे देश की चुनी हुई सरकार पर उनका सीधा शिकंजा कस गया है।
वैश्विक मंच पर क्यों हो रही है पाकिस्तान की किरकिरी?
इस कानून के तेजी से और बिना किसी सार्थक संसदीय बहस के पारित होने के बाद से ही वैश्विक मंचों पर और खुद पाकिस्तान के भीतर देश की भारी आलोचना हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की मौजूदगी में इस तरह के कानून का पास होना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि इस्लामाबाद में असली सत्ता का केंद्र अब प्रधानमंत्री हाउस नहीं, बल्कि रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) बन चुका है।
यही वजह है कि दुनिया भर के विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान में 'अघोषित मार्शल लॉ' करार दे रहे हैं, जहां लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करके सीधे तौर पर वर्दीधारी अधिकारियों को देश की संपूर्ण बागडोर सौंप दी गई है। वर्तमान में जिस तरह से पाकिस्तान गंभीर आर्थिक बदहाली और आंतरिक असंतोष से जूझ रहा है, ऐसे में सैन्य नेतृत्व को कानूनी रूप से सर्वशक्तिशाली बनाना देश के भविष्य और लोकतंत्र के लिए एक बड़ा संकट बनता जा रहा है।