खमेनेई का पार्थिव शरीर आते ही टूटा कालिबाफ का सब्र, 40 साल के साथी को देख बिलख-बिलख कर रोए स्पीकर
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई का पार्थिव शरीर जैसे ही अंतिम दर्शन के लिए जनता के बीच लाया गया, पूरा माहौल गमगीन हो गया। इस भावुक कर देने वाले दृश्य ने न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालिबाफ, जो दशकों से खमेनेई के सबसे भरोसेमंद और करीबी सहयोगियों में से एक रहे हैं, अपने आंसू नहीं रोक पाए। ताबूत को देखते ही कालिबाफ की बेबसी और उनका बिलख-बिलख कर रोना एक 40 साल लंबे अटूट साथ के अंत का प्रतीक बन गया है।
चार दशक का अटूट बंधन और आखिरी विदाई
मोहम्मद बाकर कालिबाफ और अयातुल्ला खमेनेई का रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि गहरा व्यक्तिगत और वैचारिक रहा है। कालिबाफ ने अपनी युवावस्था से लेकर राजनीति के शीर्ष शिखर तक खमेनेई के मार्गदर्शन में काम किया है। जब ताबूत को मंच पर रखा गया, तो कालिबाफ पूरी तरह टूट गए। उनके आंसुओं में न केवल एक नेता को खोने का दर्द था, बल्कि उस दौर की यादें भी थीं, जिसमें उन्होंने खमेनेई के साथ मिलकर ईरान की इस्लामी क्रांति और सैन्य रणनीतियों को आकार दिया था। यह विदाई उन तमाम पुराने साथियों के लिए भी एक झटके की तरह है जिन्होंने दशकों तक खमेनेई के विजन पर काम किया है।
कालिबाफ का शोक और ईरान की बदलती तस्वीर
कालिबाफ का सार्वजनिक रूप से इस तरह रोना ईरान की राजनीति में एक बड़े भावनात्मक बदलाव का संकेत है। जहां एक ओर ईरान के कट्टरपंथी धड़े देश को 'बदले' की आग में झोंकने की बात कर रहे हैं, वहीं कालिबाफ जैसे नेताओं का दुख यह दर्शाता है कि खमेनेई के जाने के बाद ईरान के सत्ता गलियारों में एक गहरा शून्य पैदा हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि कालिबाफ की यह प्रतिक्रिया ईरान के भीतर खमेनेई के प्रति आम जनमानस और सैन्य नेतृत्व के गहरे सम्मान और जुड़ाव को बयां करती है। यह दृश्य दुनिया को यह भी बताता है कि खमेनेई केवल एक सर्वोच्च नेता नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए एक अभिभावक भी थे जो लंबे समय से उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे।
अंत्येष्टि में उमड़ा जनसैलाब
तेहरान के सड़कों पर उमड़ी लाखों की भीड़ और उस पर कालिबाफ का यह विलाप, ईरान के वर्तमान संकटपूर्ण समय की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है। खमेनेई के ताबूत के चारों ओर जमा हुए ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारी और राजनीतिक दिग्गज अब एक ऐसे भविष्य की ओर देख रहे हैं जो अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। कालिबाफ की यह बेबसी उन करोड़ों लोगों की भावनाओं का प्रतिबिंब है जो एक युग के अंत को देख रहे हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या खमेनेई का उत्तराधिकारी कालिबाफ जैसे वफादार साथियों को विश्वास में लेकर ईरान को इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से बाहर निकाल पाएगा, या देश का आंतरिक कलह और गहराएगा।