10 हाथियों जितना बारूद और तबाही का खौफ: अमेरिका ने ईरान में उतारा कोल्ड वॉर का खतरनाक B-1 बॉम्बर

10 हाथियों जितना बारूद और तबाही का खौफ: अमेरिका ने ईरान में उतारा कोल्ड वॉर का खतरनाक B-1 बॉम्बर

मध्य पूर्व में सुलग रही जंग की आग अब अपने सबसे खतरनाक और विनाशकारी दौर में पहुंच गई है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब खुलकर खूनी संघर्ष का रूप ले चुका है। इसी बीच अमेरिकी सेना ने अपनी ताकत का ऐसा खौफनाक प्रदर्शन किया है जिसे देखकर पूरी दुनिया के होश उड़ गए हैं। अमेरिका ने ईरान समर्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए शीत युद्ध (Cold War) के दौर के अपने सबसे घातक और शक्तिशाली एयरक्राफ्ट 'B-1 लांसब्रिर' यानी B-1 बॉम्बर को मैदान में उतार दिया है। इस सुपरसोनिक बॉम्बर की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह अपने साथ करीब 10 हाथियों के वजन के बराबर यानी मीट्रिक टन बारूद और विस्फोटक लेकर उड़ने की क्षमता रखता है।

क्या है B-1 बॉम्बर की खासियत और क्यों कांप रहे हैं दुश्मन?

बी-1 लांसर (B-1 Lancer) अमेरिकी वायुसेना का एक ऐसा भारी-भरकम और सुपरसोनिक बॉम्बर है, जो अपनी भीषण मारक क्षमता और सटीक निशाना साधने के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। शीत युद्ध के समय सोवियत संघ को टक्कर देने के लिए बनाए गए इस विमान को आधुनिक हथियारों और अत्याधुनिक एवियोनिक्स से लैस किया गया है। यह बॉम्बर बिना किसी रोक-टोक के दुश्मन के आसमान में कोहराम मचा सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारंपरिक हथियारों और गाइडेड मिसाइलों का एक ऐसा विशाल जखीरा अपने पेट में छिपाकर चलता है, जो कुछ ही पलों में किसी भी देश के सैन्य ठिकानों, बंकरों और एयरबेस को मलबे के ढेर में बदल सकता है।

ईरान के IRGC अड्डों पर अमेरिका की भारी एयरस्ट्राइक

अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम के बाद ईरान समर्थित मिलिशिया और IRGC के ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइल और बमबारी की गई है। मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों और सैन्य अड्डों पर लगातार हो रहे हमलों का जवाब देने के लिए वाशिंगटन ने इस बार सीधे तौर पर रणनीतिक बमवर्षकों का इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, B-1 बॉम्बर ने अपनी भारी-भरकम मारक क्षमता का इस्तेमाल करते हुए ईरान से जुड़े रणनीतिक कमांड सेंटर्स, हथियार डिपो और खुफिया ठिकानों को पूरी तरह स्वाहा कर दिया है। इस हमले के बाद पूरे इलाके में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।

मध्य पूर्व में तीसरे विश्व युद्ध जैसे मंडरा रहे हैं काले बादल

अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत ने ग्लोबल लेवल पर एक नए युद्ध की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। जिस तरह से अमेरिका ने अपने सबसे बड़े और विध्वंसकारी बॉम्बर को इस संघर्ष में झोंक दिया है, उससे साफ जाहिर है कि आने वाले दिनों में यह जंग और अधिक भयानक रूप ले सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस तनाव को कूटनीतिक स्तर पर जल्द नहीं रोका गया, तो यह मध्य पूर्व की सीमाओं को लांघकर पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर संकट आ खड़ा हुआ है।

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