आसमान में 'किलर' का राज! अमेरिका बना रहा 1850 किमी रेंज वाली मिसाइल, चीन-रूस के रडार भी नहीं देख पाएंगे दुश्मन का अंत
दुनियाभर में जारी तनाव और बढ़ते सैन्य टकरावों के बीच, अमेरिकी वायुसेना ने भविष्य के हवाई युद्ध में अपनी बादशाहत कायम करने के लिए एक 'गेम-चेंजर' मिसाइल प्रोजेक्ट पर काम तेज कर दिया है। 'एयर फोर्स लॉन्ग रेंज वेपन' (AFLRW) प्रोग्राम के तहत अमेरिका एक ऐसी महाविनाशक मिसाइल विकसित कर रहा है, जो 1,850 किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के ठिकानों को पलक झपकते ही राख में बदल देगी। इस मिसाइल की मारक क्षमता मौजूदा दौर की किसी भी 'एयर-टू-एयर' मिसाइल से कई गुना अधिक है, जो इसे सैन्य क्षेत्र में एक अपराजेय हथियार बनाती है।
चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका को इस लंबी दूरी के हथियार की जरूरत मुख्य रूप से प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए पड़ी है। जहां चीन अपनी PL-17 जैसी मिसाइलों से अमेरिकी सेना को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है, वहीं 1,850 किमी रेंज की AFLRW मिसाइल अमेरिका को युद्ध के मैदान में चीन पर एक निर्णायक बढ़त दिलाएगी। इस प्रोजेक्ट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी वायुसेना 25-26 अगस्त 2026 को एगलिन एयरफोर्स बेस पर रक्षा उद्योग के दिग्गजों के साथ इस पर एक गुप्त मंथन करने जा रही है।
कैसे काम करेगी यह 'स्मार्ट' मिसाइल? सबसे बड़ा सवाल यह है कि पृथ्वी की गोलाई और रडार की सीमा (550 किमी) के बावजूद यह मिसाइल 1,850 किमी दूर लक्ष्य को कैसे साधेगी? इसका जवाब 'नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर' या 'किल वेब' तकनीक में छिपा है। आधुनिक युद्ध में केवल एक विमान का रडार काफी नहीं होता। यह मिसाइल अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स, जमीन पर स्थित रडार स्टेशनों और अन्य टोही विमानों (AEW&C) से मिले डेटा का उपयोग करके अपने लक्ष्य तक पहुंचेगी। यानी, दुश्मन को भनक लगे बिना ही उसे सैकड़ों किलोमीटर दूर से निशाना बनाया जा सकेगा।
दुनिया की शीर्ष मिसाइलों के मुकाबले AFLRW की ताकत मौजूदा समय में कोई भी देश अमेरिका के इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट के आसपास भी नहीं है। रूस की R-37M (लगभग 300 किमी) या चीन की PL-17 (लगभग 400 किमी) जैसी मिसाइलें AFLRW की 1,850+ किलोमीटर की रेंज के सामने बौनी नजर आती हैं। भारत की अस्त्र फैमिली और यूरोप की मीटियर मिसाइलें भी इस नई अमेरिकी तकनीक के मुकाबले काफी पीछे हैं। अगर अमेरिका का यह प्रयोग सफल रहता है, तो यह 'बियॉन्ड विजुअल रेंज' (BVR) कॉम्बैट में एक नए युग की शुरुआत होगी, जहां दुश्मन विमान के पायलट को यह पता भी नहीं चलेगा कि हमला किसने और कहां से किया।