ईरान पर टूट पड़ा महासंकट: 2 मुस्लिम देशों ने मिलकर किया भीषण हमला, UAE ने भी थाम लिया हाथ
मिडिल ईस्ट यानी मध्य पूर्व के अशांत और तनावपूर्ण माहौल से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली भू-राजनीतिक (Geopolitical) खबर सामने आ रही है। ईरान के खिलाफ अब एक बिल्कुल नया और बेहद खतरनाक सैन्य मोर्चा खुल चुका है। हमेशा पश्चिमी देशों या इजरायल के निशाने पर रहने वाले ईरान पर इस बार दो बड़े मुस्लिम देशों ने मिलकर एक बड़ा रणनीतिक हमला बोल दिया है। इस चौंकाने वाले सैन्य घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी इस गठबंधन को अपना खुला समर्थन दे दिया, जिसने पूरे खाड़ी क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा समीकरण को हिलाकर रख दिया है।
खाड़ी देशों के इस औचक हमले से ईरान में हड़कंप
तेहरान से आ रही शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला ईरान के सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया है। दो पड़ोसी मुस्लिम मुल्कों के इस संयुक्त सैन्य एक्शन ने ईरान के रक्षा तंत्र को पूरी तरह से चौंका दिया है। अब तक ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के सीधे सैन्य एक्शन से बचने वाले खाड़ी देशों (Gulf Countries) का यह आक्रामक रुख यह साफ दर्शाता है कि क्षेत्र में क्षेत्रीय संप्रभुता और सुरक्षा को लेकर पानी सिर से ऊपर जा चुका है। हमले के बाद ईरान की सीमाओं और प्रमुख सैन्य अड्डों पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
UAE के पीछे से समर्थन देने के क्या हैं मायने?
इस पूरे विवाद में यूएई (UAE) की भूमिका ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और कूटनीतिज्ञों को हैरान कर दिया है। आर्थिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले यूएई का इस मोर्चे में शामिल होना यह साफ संकेत देता है कि ईरान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और प्रॉक्सी वॉर से खाड़ी के देश अब बेहद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यूएई ने न केवल इस हमले को अपना रणनीतिक समर्थन दिया है, बल्कि खुफिया सूचनाएं साझा करने और लॉजिस्टिक्स के स्तर पर भी सहयोग किया है। यह कदम ईरान को पूरी दुनिया और विशेष रूप से मुस्लिम जगत में अलग-थलग करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
लोकल और ग्लोबल मार्केट पर मंडराया युद्ध का खतरा
इस नए मोर्चे के खुलने का सीधा असर भारत सहित दुनिया भर के तेल बाजारों (Crude Oil Markets) और मुंबई-दिल्ली जैसे प्रमुख आर्थिक केंद्रों पर देखने को मिल सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के करीब बढ़ते इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आने की आशंका पैदा हो गई है। स्थानीय बाजारों में लॉजिस्टिक्स और शिपिंग कंपनियों ने अपनी रूटिंग बदलना शुरू कर दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस हमले का ईरान ने कोई बड़ा पलटवार किया, तो यह सीमित सैन्य कार्रवाई एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है, जिससे पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट में आ जाएगी।