अंतिम संस्कार में काला छाता क्यों लेकर जाते हैं लोग? चीन और ब्रिटेन की इस रहस्यमयी परंपरा के पीछे की असली वजह जानकर चौंक जाएंगे आप!

अंतिम संस्कार में काला छाता क्यों लेकर जाते हैं लोग? चीन और ब्रिटेन की इस रहस्यमयी परंपरा के पीछे की असली वजह जानकर चौंक जाएंगे आप!

अंतिम संस्कार जैसी गंभीर रस्मों में काले छाते का दिखना केवल एक संयोग नहीं है. हॉलीवुड और विदेशी फिल्मों में कब्रिस्तान के दृश्यों में लोगों के हाथों में काला छाता आपने भी जरूर देखा होगा. पहली नजर में यह सिर्फ खराब मौसम या बारिश से बचने का एक साधन लग सकता है, लेकिन दुनिया के अलग-अलग कोनों में इस साधारण से छाते को लेकर बेहद हैरान करने वाली सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं, खासकर चीन और ब्रिटेन में.

चीन में छाते का आत्मा और यिन ऊर्जा से गहरा कनेक्शन

चीनी परंपराओं में छाते को केवल धूप या पानी से बचने की चीज नहीं माना जाता, बल्कि इसे परालौकिक और आध्यात्मिक दुनिया से जोड़कर देखा जाता है. पुरानी लोक मान्यताओं के अनुसार, छाता बारिश का पानी सोखता है और नमी को अपने भीतर समेट लेता है. इस नमी को चीनी संस्कृति में 'यिन ऊर्जा' यानी रहस्यमयी या नकारात्मक शक्तियों का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि आज भी कई चीनी परिवारों में घर के अंदर खुला छाता रखना पूरी तरह वर्जित है.

मृतक की विदाई और सूरज की रोशनी से आत्मा की रक्षा

चीन के कुछ हिस्सों में अंतिम विदाई के समय मृतक के शव या उसकी तस्वीर के ऊपर काला छाता तानने का रिवाज है. इसके पीछे यह लोक मान्यता है कि सूर्य की तेज और सीधी रोशनी मृतक की आत्मा के लिए कष्टकारी हो सकती है. ऐसे में यह काला छाता एक ढाल की तरह काम करता है और आत्मा को सुरक्षित रखता है. इसके अलावा, चीन में किसी को छाता गिफ्ट करना भी बेहद अशुभ माना जाता है, क्योंकि वहां छाते को रिश्तों में अलगाव और दूरी आने का सूचक माना जाता है.

ब्रिटेन का अनिश्चित मौसम और 'ब्रोली' की अनोखी परंपरा

चीन से बिल्कुल उलट, ब्रिटेन और यूरोपीय देशों में अंतिम संस्कार में काला छाता ले जाने की वजह पूरी तरह व्यावहारिक है. ब्रिटेन का मौसम अपनी अनिश्चितता के लिए बदनाम है, जहां धूप खिले होने पर भी अचानक तेज बारिश शुरू हो जाती है. ऐसे में कब्रिस्तान में अंतिम विदाई की रस्म बिना किसी रुकावट के पूरी हो सके, इसलिए लोग अपने साथ छाता रखते हैं, जिसे वहां स्थानीय भाषा में 'ब्रोली' भी कहा जाता है. समय के साथ यह व्यावहारिक जरूरत अब वहां सम्मान प्रकट करने की एक गंभीर परंपरा बन चुकी है, इसलिए मौसम साफ होने पर भी लोग काले कपड़े पहनकर हाथ में काला छाता लिए नजर आते हैं.

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