'भाषण में धमकी अधिक क्यों थी?': सीएम योगी के अयोध्या दौरे पर अखिलेश यादव का बिना नाम लिए बड़ा हमला, बोले— 'सोने-चांदी और जेवरों का भी देना होगा हिसाब'
अयोध्या राम मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों रुपये की नकदी गायब होने के मामले पर छिड़ा सियासी घमासान अब अपने चरम पर पहुंच गया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे और वहां विपक्ष पर दिए गए कड़े बयानों के बाद, समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोर्चा खोल दिया है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर बिना नाम लिए मुख्यमंत्री और सरकार की मंशा पर बेहद गंभीर और तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का यह अचानक बना दौरा केवल और केवल विशेष जांच दल (SIT) की जांच को प्रभावित करने और अयोध्या में भाजपा की खिसकती राजनीतिक जमीन को बचाने की एक हताश कोशिश थी।
'आज के भाषण में बयान कम, धमकी अधिक क्यों थी?' - सपा प्रमुख का पहला वार
अखिलेश यादव ने अपने एक्स हैंडल पर सिलसिलेवार ढंग से सरकार को घेरते हुए लिखा, "आज के भाषण में बयान कम, धमकी अधिक क्यों थी? आज का कार्यक्रम अचानक बना था या जिस दिन एसआईटी बनी थी, उस दिन?"
उन्होंने आंतरिक सूत्रों के हवाले से दावा करते हुए आगे लिखा, "सूत्र ये क्यों कह रहे हैं कि स्थानीय भाजपाई विधायकों और पदाधिकारियों के कहने पर ये कार्यक्रम अचानक तय किया गया, जिससे कि भाजपा की राजनीतिक जमीन बचाई जा सके, नहीं तो अयोध्या मंडल ही नहीं, पूरे उप्र में भाजपा का सूपड़ा साफ होना तय है।"
एसआईटी की छवि पर उठाए सवाल, बोले- 'जांच को प्रभावित न करें सीएम'
इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) पर सीधा सवाल उठाते हुए सपा प्रमुख ने लिखा कि मुख्यमंत्री को इस तरह भौतिक रूप से अयोध्या का भ्रमण करके एसआईटी के काम को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एसआईटी पहले से ही अपने विवादास्पद सदस्यों और कलंकित छवि के कारण जनता और विपक्ष की शंकाओं के घेरे में है।
मुख्यमंत्री के बॉडी लैंग्वेज पर तंज कसते हुए अखिलेश ने लिखा, "आज वहां चेहरा उतरा हुआ क्यों था? आवाज को तो जानबूझकर ऊंची करने का प्रयास पूरा था, लेकिन आत्मविश्वास शून्य क्यों था? इस बार अपने खास लोगों से मिले क्यों नहीं?"
'दूध का दूध नहीं, सोने का सोना और चांदी की चांदी करें'
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि '15 दिन में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा', अखिलेश यादव ने जनता के हवाले से नया नारा दिया। उन्होंने लिखा, "जनता कह रही है ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ नहीं ‘सोने का सोना, चांदी की चांदी’ करें। प्रभु रामलला के दरबार में चढ़ाए गए पैसों, अनमोल शिलाओं के अलावा बहुमूल्य धातुओं और सोने-चांदी के जेवरों का भी पाई-पाई का हिसाब देना ही पड़ेगा।"
एक अन्य पोस्ट में सपा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री की बार-बार होने वाली अयोध्या यात्राओं पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा, "एक एसआइटी (SIT) किसी की रिकॉर्ड तोड़ अयोध्या यात्राओं की पड़ताल के लिए भी बनानी चाहिए।" अखिलेश यादव के इस चौतरफा हमले ने साफ कर दिया है कि विपक्ष इस बार राम मंदिर ट्रस्ट और सरकार को पारदर्शिता के मुद्दे पर पूरी तरह घेरने के मूड में है और आने वाले दिनों में यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति को और गरमाएगा।