राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: चंदा चोरों ने अय्याशी के बजाय जमीन-गाड़ियों में खपाया काला धन, रिश्तेदारों के नाम खरीदी संपत्ति
जमीन और कारोबार में खपाया चोरी का पैसा अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे आरोपियों के काले कारनामों की परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस और एसआईटी की जांच में यह साफ हो गया है कि आरोपियों ने चोरी की रकम का इस्तेमाल दिखावटी अय्याशी के बजाय संपत्ति बनाने में किया। उन्होंने अयोध्या और फैजाबाद के आसपास न केवल बेशकीमती प्लॉट खरीदे, बल्कि खेती की जमीनें भी अपने और अपने करीबी रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज कराईं। पुलिस को यह भी पता चला है कि कई आरोपियों ने अपने रिश्तेदारों के कारोबार में भारी निवेश किया ताकि अवैध पैसों को वैध बनाकर छिपाया जा सके।
दो साल में ही बदल गई आरोपियों की किस्मत हैरानी की बात यह है कि ये सभी आरोपी मंदिर निर्माण कार्य से पिछले महज दो से ढाई साल के भीतर ही जुड़े थे। लेकिन इतने कम समय में ही इनके रहन-सहन में आया बदलाव किसी की भी नजरों से नहीं बचा। कुछ आरोपियों ने साधारण बाइक से शुरुआत की और देखते ही देखते कार के मालिक बन गए। मुख्य आरोपी टिन्नू यादव से लेकर अनुकल्प मिश्रा तक, सभी के वित्तीय व्यवहार में संदिग्ध उछाल देखा गया। कौशलपुरी में अनुकल्प मिश्रा द्वारा हाल ही में खरीदा गया 40 लाख का आलीशान घर इस बात का प्रमाण है कि मंदिर के चढ़ावे का पैसा पानी की तरह बहाया गया।
पुलिस की छापेमारी और संपत्ति का आकलन रविवार को पुलिस ने सभी सात मुख्य आरोपियों के ठिकानों पर सघन छापेमारी की। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बहुत ही सुनियोजित तरीके से पैसों को ठिकाने लगाया था। टिन्नू यादव का मामला तो और भी पेचीदा है; उसके नाम पर अयोध्या में 14 कमरों का एक हॉस्टल भी है, जिसे उसने निर्माण एजेंसी को किराए पर दिया था। वहीं दूसरी तरफ, रमाशंकर मिश्रा जैसे आरोपियों ने अपने परिवार की बेहद सामान्य स्थिति बनाए रखी ताकि किसी को शक न हो, जबकि वे अंदरखाने पैसे खपाने की जुगत में लगे थे। फिलहाल, पुलिस अब उन सभी संपत्तियों और बैंक खातों की सूची तैयार कर रही है जो इन आरोपियों ने मंदिर के पैसे से बनाई हैं।