"एक राष्ट्र, एक चुनाव" देश के विकास का पोषक बनेगा, राज्‍यों के आर्थिक बोझ कम होगा, केशव प्रसाद मौर्य उप मुख्‍यमंत्री

केशव प्रसाद मौर्य ने आज लखनऊ के होटल ताज, गोमती नगर में संविधान (129वाँ संशोधन) विधेयक, 2024 तथा संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति (Joint Parliamentary Committee) के अध्ययन दौरे के दौरान आयोजित विचार-विमर्श में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने समिति के समक्ष "एक राष्ट्र, एक चुनाव" की अवधारणा का पूर्ण समर्थन करते हुए इसे राष्ट्रहित, जनहित एवं सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी कदम बताया। 

उन्होंने कहा कि संविधान (129वाँ संशोधन) विधेयक, 2024 तथा संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 "एक राष्ट्र, एक चुनाव" को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण संवैधानिक पहल हैं। अनुच्छेद 82A के माध्यम से लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने का संवैधानिक आधार तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित "नियत तिथि" से लोकसभा एवं विधानसभाओं के कार्यकाल का समायोजन किया जाएगा तथा भारत निर्वाचन आयोग को एक साथ आम चुनाव कराने का अधिकार प्रदान किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर निर्वाचन आयोग किसी विशेष विधानसभा का चुनाव बाद में कराने की अनुशंसा भी कर सकेगा । प्रस्तावित संशोधनों के अंतर्गत अनुच्छेद 83 एवं 172 में भी परिवर्तन का प्रावधान किया गया है, ताकि यदि लोकसभा अथवा कोई विधानसभा समय से पूर्व भंग होती है तो नवगठित सदन केवल शेष कार्यकाल के लिए ही कार्य करेगा। इससे भविष्य में चुनावों का चक्र पुनः एक साथ बनाए रखना संभव होगा।

श्री मौर्य ने बार-बार चुनाव से होने वाले नुकसान के बारे में बताया -  बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव कार्यों में लगाई जाती है, जिससे विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है। पुलिस एवं सुरक्षा बलों तथा अन्य सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारियों की चुनाव से कानून व्यवस्था में अवरोध उत्पन्न होता है, विकास कार्यों में देरी होती है, राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है.

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