Lucknow Aliganj Coaching Fire SIT Report : अंदर ही लगे थे AC आउटर, 18 इंजीनियर दोषी; आरोपियों को 14 दिन की जेल
Lucknow Aliganj Coaching Fire SIT Report : लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक कोचिंग सेंटर अग्निकांड (Lucknow Aliganj Fire) मामले में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच में रोंगटे खड़े कर देने वाले और चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। वरिष्ठ पत्रकार विशाल रघुवंशी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बहुमंजिला इमारत का निर्माण न केवल अवैध था, बल्कि इसके भीतर सुरक्षा मानकों की ऐसी घोर अनदेखी की गई थी जिसने मासूम बच्चों के लिए मौत का जाल बुन दिया।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए ५ जोनल अधिकारियों सहित १८ इंजीनियरों को दोषी पाया है, वहीं कोर्ट ने गिरफ्तार सभी चारों मुख्य आरोपियों को १४ दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेज दिया है।
SIT रिपोर्ट के ५ सबसे चौंकाने वाले खुलासे: जानबूझकर की गई लापरवाही
एसआईटी की जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि प्रतिष्ठान के मैनेजर, डायरेक्टर और उनके सहयोगियों ने व्यावसायिक लाभ के लिए फायर सेफ्टी की बुनियादी व्यवस्थाओं को पूरी तरह ताक पर रख दिया था:
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धुआं निकलने का कोई रास्ता नहीं: पूरी बिल्डिंग में वेंटिलेशन या ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे आग लगने की स्थिति में धुआं बाहर निकल सके। हादसे के वक्त दम घुटने की यह सबसे बड़ी वजह बनी।
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अंदर ही लगा दिए AC आउटर: तकनीकी रूप से एसी के आउटर (Outdoor Units) और भारी बिजली के उपकरण खुली हवा में होने चाहिए, लेकिन इस इमारत के भीतर ही बेहद असुरक्षित और अनियमित तरीके से इन्हें फिट किया गया था, जिससे शॉर्ट-सर्किट का खतरा कई गुना बढ़ गया।
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इमरजेंसी एग्जिट का गायब होना: आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए पूरी बिल्डिंग में कोई दूसरा निकास द्वार (Emergency Exit) या आकस्मिक द्वार नहीं बनाया गया था।
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एक ही संकरा रास्ता: पूरी इमारत में आने और जाने के लिए केवल एक ही मुख्य रास्ता था। बिजली कटते ही और आग की लपटें बढ़ने से यह इकलौता रास्ता भी ब्लॉक हो गया।
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अनलॉक नहीं हुआ डोर: जांच में सामने आया कि मुख्य द्वार का इलेक्ट्रॉनिक/ऑटोमैटिक लॉक सिस्टम फेल होने की वजह से ही १५ लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके और भीतर ही फंस गए।
SIT की सख्त टिप्पणी: आरोपियों को इस बात का भली-भांति अंदाजा था कि किसी भी आकस्मिक दुर्घटना की स्थिति में अंदर मौजूद लोगों की जान जा सकती है। इसके बावजूद उन्होंने जानबूझकर लापरवाही की, जो कि एक गंभीर आपराधिक कृत्य है।
LDA का बड़ा एक्शन: ५ जोनल अफसर और १८ इंजीनियरों पर गिरेगी गाज
इस दर्दनाक हादसे ने एलडीए के भीतर फैले भ्रष्टाचार की पोल खोलकर रख दी है। एलडीए (LDA) ने एसआईटी को सौंपे अपने आधिकारिक बयान में स्वीकार किया है कि अलीगंज की इस अवैध बिल्डिंग के निर्माण और निगरानी में विभाग के स्तर पर घोर लापरवाही बरती गई।
प्राधिकरण ने जांच के आधार पर तत्कालीन विहित प्राधिकारी, ५ जोनल अधिकारियों और १८ इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय की है। इन सभी को हादसे का दोषी पाते हुए इनके खिलाफ सख्त विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति (Recommendation) की रिपोर्ट एलडीए वीसी (VC) द्वारा शासन को भेज दी गई है।
अवैध बिल्डिंग पर चलेगा बुलडोजर: १५ दिन का अल्टीमेटम
हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण अब पूरी तरह सख्त रुख अपनाए हुए है। एलडीए ने इस पूरी बिल्डिंग को अवैध निर्माण घोषित करते हुए भवन मालिकों को ध्वस्तीकरण (Demolition) का कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले १५ दिनों के भीतर भवन स्वामियों की तरफ से कोई संतोषजनक और वैध जवाब नहीं मिला, तो इस पूरी अवैध इमारत पर प्रशासन का बुलडोजर चलाकर इसे जमींदोज कर दिया जाएगा।
कोर्ट का सख्त फैसला: चारों आरोपी भेजे गए जेल
पुलिस द्वारा अलीगंज थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किए गए चारों मुख्य आरोपियों को स्थानीय कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चारों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर उन्हें १४ दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में जेल भेजने का आदेश दिया है।
जेल भेजे गए आरोपियों की सूची:
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वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (इमारत/भवन के मुख्य मालिक)
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रामकृष्ण उपाध्याय (बिल्डिंग के भीतर 'अलीगंज पेट शॉप एंड क्लीनिक' चलाने वाले)
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तुशाक कृष्णा जायसवाल (बिल्डिंग में 'हेक्सा थ्री डी एनिमेशन' इंस्टीट्यूट के संचालक)
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सुरेश कुमार साहू (संस्थान के सह-संयोजक/हेड हूपर्स इंस्टीट्यूट के संचालक)
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, शासन स्तर पर इस मामले की रोजाना मॉनिटरिंग की जा रही है और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद लापरवाही बरतने वाले सरकारी अधिकारियों की गिरफ्तारी भी संभव है।