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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर महा-संग्राम: 'करोड़ों भक्तों की आस्था से खिलवाड़', सीएम योगी के बयान पर सपा-कांग्रेस का पलटवार, नृपेंद्र मिश्रा ने भी मानी यह बात

अयोध्या में प्रभु श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों रुपये की नकदी गायब होने और वित्तीय अनियमितताओं के कथित आरोपों ने अब देश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह प्रशासनिक मामला पूरी तरह से राजनीतिक गलियारों में गरमा चुका है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे और वहां दिए गए कड़े बयानों के बाद अब मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने सरकार व मंदिर प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। टीवी डिबेट्स से लेकर सोशल मीडिया तक, इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है।

सीएम योगी का अयोध्या से पलटवार और 15 दिन का भरोसा

हाल ही में अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ₹378 करोड़ की सौगात देने के साथ ही राम मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावा गायब होने के मामले पर पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो लोग आज राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए रामभक्तों के हितों की बात कर रहे हैं, उनका अपना इतिहास हमेशा राम विरोधी रहा है।

सीएम योगी ने देश के श्रद्धालुओं से संयम रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि एसआईटी बेहद निष्पक्षता से काम कर रही है और आगामी 15 दिनों के भीतर इस पूरे मामले का सच सबके सामने आ जाएगा। उन्होंने साफ किया कि आस्था के केंद्र में सेंध लगाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

'यह केवल पैसों का नहीं, आस्था का गबन है' — सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने एक टीवी शो के दौरान सरकार और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला। भदौरिया ने दो टूक कहा, "यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता या किसी सामान्य चोरी का नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के करोड़ों रामभक्तों की अगाध आस्था और उनके द्वारा पूरी श्रद्धा से चढ़ाए गए गुप्त दान का है।"

सपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि जब राम मंदिर के भीतर से चढ़ावे में इतनी बड़ी हेराफेरी की बात सामने आई, तो शुरुआत में मंदिर प्रबंधन और बीजेपी की तरफ से जनता को कोई साफ जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से अयोध्या के विकास और वहां की व्यवस्थाओं में पूरी पारदर्शिता की मांग करती रही है और इस बार भी वह सच्चाई सामने लाकर ही दम लेगी।

कांग्रेस ने भी घेरा, मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का बयान चर्चा में

इस राजनीतिक घमासान में कांग्रेस भी पूरी ताकत से कूद पड़ी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सरकार से इस पूरे मामले में नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि जब मंदिर की सुरक्षा और निगरानी का जिम्मा इतनी बड़ी एजेंसियों के पास है, तो यात्री सुविधा केंद्र (PFC) के टॉयलेट से लेकर खुफिया ठिकानों तक करोड़ों रुपये कैसे पार होते रहे?

इस बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का एक हालिया बयान इस समय सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। नृपेंद्र मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि 'मंदिर परिसर के भीतर चढ़ावे और दान की मौजूदा निगरानी व्यवस्था (Monitoring System) को और ज्यादा मजबूत, आधुनिक तथा फुलप्रूफ बनाने की सख्त जरूरत है।'

नृपेंद्र मिश्रा के इस बयान को विपक्ष अपनी जीत और आरोपों के सबसे बड़े प्रमाण के रूप में पेश कर रहा है। विपक्ष का तर्क है कि जब खुद प्रबंधन के मुखिया मान रहे हैं कि व्यवस्था में लूपहोल्स (कमियां) थे, तो इसका मतलब साफ है कि चोरी बड़े स्तर पर हुई है। हालांकि, मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि व्यवस्था में सुधार करना एक सामान्य और सतत प्रक्रिया है, इसे राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

बीजेपी का पलटवार: जांच से पहले ही माइलेज ढूंढ रहा है विपक्ष

विपक्ष के इन चौतरफा हमलों पर पलटवार करते हुए बीजेपी नेताओं और प्रवक्ताओं का तर्क है कि विपक्ष बिना किसी तथ्य के, सिर्फ एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले राजनीतिक लाभ (Political Mileage) लेने की छटपटाहट में है।

सत्तारूढ़ दल का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है, और यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर ढिलाई न होने देने के लिए इसकी जांच सीधे एसआईटी को सौंपी गई है। फिलहाल, उत्तर प्रदेश की सियासत में राम मंदिर का यह चढ़ावा विवाद एक बहुत बड़ा मुद्दा बन चुका है और अब हर किसी की निगाहें एसआईटी की उस क्लोजर रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद के अंतिम सच और इसमें शामिल सफेदरपोशों के चेहरों को बेनकाब करेगी।

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