'गंगा सिर्फ एक धर्म की नहीं, पूरे देश की आस्था है', नाव पर इफ्तार करने वालों को हाईकोर्ट की बड़ी नसीहत
वाराणसी में पवित्र रमजान महीने के दौरान गंगा नदी में एक नाव पर इफ्तार करने को लेकर काफी बवाल मचा था। पुलिस ने इस मामले में 14 नौजवानों को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि इन लोगों ने नाव पर इफ्तार पार्टी की और नदी में खाने के बाद हड्डियां फेंकी। अब इस मामले में एक नया अपडेट सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को अलग-अलग सुनवाई करते हुए गिरफ्तार किए गए इन 14 युवकों में से पांच को जमानत दे दी है।
धार्मिक भावनाओं और आस्था पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने कई जरूरी बातें कहीं। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि गंगा नदी में मांसाहारी खाने का कचरा फेंकने जैसी हरकतें निश्चित रूप से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचा सकती हैं। कोर्ट ने याद दिलाया कि गंगा सिर्फ हिंदू समाज ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गहरी आस्था और सांस्कृतिक महत्व का प्रतीक है। अदालत का मानना था कि अगर कुछ लोगों के ऐसे गैर-जिम्मेदाराना कामों से सामाजिक और धार्मिक सौहार्द बिगड़ता है, तो इससे समाज में तनाव और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में आपसी भाईचारे का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है।
पश्चाताप और नाविक की थ्योरी पर उठे सवाल
भले ही कोर्ट ने घटना की गंभीरता को समझा, लेकिन उसने आरोपियों के पश्चाताप को भी ध्यान में रखा। अदालत ने बताया कि आरोपियों और उनके परिवारों ने अपनी गलती मानी है और समाज को हुई तकलीफ के लिए सच्चा पछतावा जाहिर किया है। कोर्ट ने जमानत देते समय उनके इसी रवैये को एक बड़ा आधार बनाया।
इसके अलावा, कोर्ट ने नाव के मालिक द्वारा लगाए गए जबरन वसूली और नाव छीनने के आरोपों पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया। जस्टिस शुक्ला ने कहा कि यह बात थोड़ी अजीब और शक पैदा करने वाली लगती है कि केस दर्ज होने से पहले नाविक अनिल साहनी ने जबरन वसूली या नाव पर कब्जे की कोई शिकायत पुलिस से नहीं की थी। इतने लंबे समय बाद अचानक से ऐसे आरोप लगाना नाविक की कहानी को कमजोर बनाता है।
आखिर कैसे शुरू हुआ था ये पूरा मामला?
यह पूरा विवाद तब सुर्खियों में आया जब भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के वाराणसी इकाई के अध्यक्ष रजत जायसवाल ने पुलिस में इस घटना की शिकायत दर्ज कराई। एफआईआर में सीधा आरोप लगाया गया कि 14 युवकों ने गंगा नदी में एक नाव पर बैठकर चिकन बिरयानी खाई और बची हुई हड्डियां पवित्र नदी में फेंक दीं। पुलिस ने शुरुआती दौर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धार्मिक स्थल को अपवित्र करने और समाज में दुश्मनी व उपद्रव फैलाने के आरोप लगाए थे। बाद में नाविक के बयान के बाद पुलिस ने जबरन वसूली और जान से मारने की धमकी जैसी गंभीर धाराएं भी इस केस में जोड़ दी थीं। फिलहाल, 5 युवकों को जमानत मिलने से उन्हें थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन यह पूरा मामला समाज में आस्था और एक-दूसरे की भावनाओं के सम्मान को लेकर कई सवाल छोड़ गया है।