पैसे के बंटवारे ने खोला राज! अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी में पवन पांडेय का सबसे बड़ा खुलासा

पैसे के बंटवारे ने खोला राज! अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी में पवन पांडेय का सबसे बड़ा खुलासा

अयोध्या में रामलला के दरबार से करोड़ों रुपये के चढ़ावे और चंदे की चोरी का मामला इन दिनों देश की सियासत में भूचाल ला चुका है। इस पूरे महाघोटाले को सबसे पहले उजागर करने वाले समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने अब एक और सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने परत-दर-परत उस घटनाक्रम से पर्दा उठाया है कि कैसे सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव तक इस चोरी की खबर सबसे पहले और पुख्ता तरीके से पहुंची। पवन पांडेय के मुताबिक, इस महापाप का भांडाफोड़ किसी जांच से नहीं, बल्कि चोरों के बीच ही पैसे के बंटवारे को लेकर हुई आपस की लड़ाई की वजह से हुआ।

जब आपस में ही भिड़ गए चढ़ावा चुराने वाले

सपा नेता पवन पांडेय ने अंदरूनी सूत्रों के हवाले से बताया कि राम मंदिर के दानपात्र से करोड़ों रुपये की नगदी और कीमती आभूषणों को गायब करने का खेल काफी समय से सुनियोजित तरीके से चल रहा था। लेकिन इस खेल का अंत तब शुरू हुआ जब चोरी की गई एक बड़ी रकम के मालिकाना हक और हिस्सेदारी को लेकर आरोपियों में आपसी कलह पैदा हो गई। पैसों के बंटवारे को लेकर शुरू हुआ यह विवाद इतना बढ़ गया कि इसकी गूंज मंदिर परिसर से बाहर निकलकर स्थानीय गलियारों तक पहुंच गई।

अखिलेश यादव तक ऐसे पहुंची महाघोटाले की सटीक 'इनपुट'

पवन पांडेय ने खुलासा किया कि जब आरोपियों के बीच विवाद चरम पर था, तभी कुछ बेहद विश्वसनीय और जमीनी सूत्रों ने इसकी सटीक जानकारी उन तक पहुंचाई। चूंकि यह मामला सीधे तौर पर करोड़ों सनातनी श्रद्धालुओं की आस्था और मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के दरबार से जुड़ा था, इसलिए बिना वक्त गंवाए पूरी रिपोर्ट और सबूतों के इनपुट समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेजे गए। अखिलेश यादव ने तथ्यों की गंभीरता को देखते हुए इस मुद्दे पर तुरंत स्टैंड लिया और सोशल मीडिया से लेकर हर स्तर पर इस आवाज को बुलंद किया, जिससे पूरे देश में हड़कंप मच गया।

एसआईटी जांच और कोर्ट से बड़ी उम्मीदें

इस पूरे चंदा चोरी प्रकरण में अब चौतरफा दबाव के बाद एसआईटी (SIT) की जांच चल रही है और मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ तक भी पहुंच चुका है। विपक्ष का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर हो रही हेराफेरी को दबाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन आपसी फूट ने इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया। पवन पांडेय और अखिलेश यादव लगातार इस मामले में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं ताकि भगवान के घर में सेंध लगाने वाले मुख्य साजिशकर्ताओं को बेनकाब किया जा सके।

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