Amroha Haridwar Ganga Expressway: अमरोहा-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे को मिली मंजूरी, यूपी-उत्तराखंड के बीच सुगम होगा सफर; 62 गांवों की बदलेगी तकदीर
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को आपस में जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी 'अमरोहा-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे' परियोजना पर दोनों राज्यों के करोड़ों लोगों की निगाहें टिकी हैं। यह एक्सप्रेसवे न केवल देवभूमि हरिद्वार और यूपी के बीच आवागमन को बेहद सुगम और तेज बनाएगा, बल्कि अमरोहा जिले के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए एक नई इबारत लिखने की क्षमता रखता है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के बीच इस ऐतिहासिक परियोजना को लेकर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है, जिससे इसके निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, वर्तमान में यह प्रोजेक्ट अपनी प्रशासनिक औपचारिकताओं के बीच आगे की रफ्तार पकड़ने का इंतजार कर रहा है।
कैसा होगा एक्सप्रेसवे का स्वरूप? अमरोहा में होगी 44 किमी लंबाई
प्रस्तावित अमरोहा-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद शानदार तरीके से डिजाइन किया गया है:
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कुल लंबाई: इस नए एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 116.85 किलोमीटर होगी।
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अमरोहा में विस्तार: इस मार्ग का एक बहुत बड़ा हिस्सा अकेले अमरोहा जिले से होकर गुजरेगा, जहां इसकी लंबाई करीब 44 किलोमीटर होगी।
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शुरुआती पॉइंट: इस एक्सप्रेसवे की शुरुआत अमरोहा के मंगरौला एंट्री पॉइंट से होगी, जो विभिन्न जिलों को छूते हुए सीधे तीर्थ नगरी हरिद्वार तक जाकर समाप्त होगा।
2 तहसीलों के 62 गांवों की बदलेगी तस्वीर, यूपीडा (UPEIDA) को सौंपे गए नक्शे
इस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के निर्माण से अमरोहा जिले की दो प्रमुख तहसीलों— हसनपुर और धनौरा के कुल 62 गांवों की पूरी रूपरेखा बदलने जा रही है।
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प्रभावित क्षेत्र: हसनपुर तहसील के मंगरौला, पाइंदापुर, लुहारी खादर, सोहरका जैसे गांवों के साथ-साथ धनौरा तहसील के अटारी, मुरीदपुर, बल्दाना और वस्तौरा माफी सहित कुल 62 गांवों की भूमि का अधिग्रहण (Land Acquisition) इस प्रोजेक्ट के लिए किया जाना है।
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प्रशासनिक तैयारी: इस पूरी प्रक्रिया में करीब 1,000 से अधिक किसान सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। हाल ही में जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के निर्देशों का पालन करते हुए इन सभी प्रभावित गांवों के बंदोबस्ती मानचित्रों (नक्शों) को डिजिटल रूप से स्कैन करने का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है और यूपीडा को उपलब्ध करा दिया है।
क्यों वरदान साबित होगा यह एक्सप्रेसवे? जमीनों के बढ़े दाम और खुलेंगे रोजगार के द्वार
स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और किसानों के लिए यह एक्सप्रेसवे आर्थिक समृद्धि का एक बहुत बड़ा माध्यम माना जा रहा है। प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद से ही क्षेत्र में जमीनों की मांग और सर्किल रेट में भारी उछाल देखा जा रहा है।
भविष्य में इस 116 किमी लंबे मार्ग के दोनों ओर बड़े-बड़े उद्योग, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, बड़े होटल्स, रेस्टोरेंट और पेट्रोल पंप जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुलने की प्रबल संभावना है। हरिद्वार एक वैश्विक पर्यटन स्थल है, इसलिए अमरोहा से सीधे तेज कनेक्टिविटी मिलने के कारण यह पूरा इलाका व्यापारिक गतिविधियों का एक नया हब बन जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे।
क्या है वर्तमान स्थिति? शासन की गाइडलाइन का इंतजार
परियोजना की वर्तमान कछुआ चाल को लेकर जिला भूमि अध्याप्ति अधिकारी पुष्करनाथ चौधरी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से 'नक्शा स्कैनिंग' और शुरुआती कागजी औपचारिकताएं पूरी कर शासन को भेजी जा चुकी हैं। वर्तमान में भूमि अधिग्रहण की दरें तय करने और मुआवजा वितरण को लेकर शासन स्तर से नई गाइडलाइन या अंतिम विस्तृत निर्देश मिलने बाकी हैं। जैसे ही लखनऊ मुख्यालय (शासन) से हरी झंडी और बजट के दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, जिला प्रशासन तुरंत किसानों से वार्ता कर भूमि अधिग्रहण और एक्सप्रेसवे के सिविल कंस्ट्रक्शन की आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर देगा।