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काशी विश्वनाथ के बाद अब बनारस में बनेगा भव्य जगन्नाथ कॉरिडोर: 140 फीट ऊंचा होगा गगनचुंबी शिखर

उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी बनारस (वाराणसी) से देश भर के शिव भक्तों और सनातन धर्मावलंबियों के लिए एक बेहद अद्भुत और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर की ऐतिहासिक सफलता और भव्यता के बाद, अब वाराणसी में एक और बड़े और भव्य धार्मिक प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई है। वाराणसी के अस्सी क्षेत्र के पास स्थित ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ मंदिर को अब एक विशाल और सुंदर 'जगन्नाथ कॉरिडोर' (Jagannath Corridor) के रूप में विकसित किया जाएगा। इस नए कॉरिडोर का मुख्य आकर्षण इसका 140 फीट ऊंचा भव्य गगनचुंबी मंदिर शिखर होगा, जो बनारस के क्षितिज (Skyline) को एक नई धार्मिक पहचान देगा। इस प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद से ही काशी के स्थानीय निवासियों और यहां आने वाले पर्यटकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

कैसा होगा नया जगन्नाथ कॉरिडोर और क्या हैं इसकी खूबियां

बनारस का यह ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर ओडिशा के पुरी में स्थित मुख्य जगन्नाथ मंदिर के बाद बेहद पवित्र और प्राचीन माना जाता है। नए मास्टरप्लान के अनुसार, इस पूरे मंदिर परिसर का कायाकल्प कर इसे भव्य रूप दिया जा रहा है। कॉरिडोर के निर्माण के बाद मंदिर का गर्भगृह और मुख्य परिसर काफी बड़ा हो जाएगा, जिससे हजारों श्रद्धालु एक साथ भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र जी के दर्शन कर सकेंगे। प्रोजेक्ट के तहत बनने वाला 140 फीट ऊंचा शिखर न केवल दूर से दिखाई देगा, बल्कि इसकी वास्तुकला में पारंपरिक सनातनी और ओडिशी शैली का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। इसके अलावा, परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चौड़े रास्ते, विश्रामालय, वैदिक केंद्र और एक सुंदर नक्काशीदार परिक्रमा पथ भी तैयार किया जा रहा है।

कब तक बनकर तैयार होगा यह भव्य धार्मिक प्रोजेक्ट

श्रद्धालुओं और पर्यटकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह नया कॉरिडोर कब तक बनकर तैयार होगा और वे कब इसके भव्य रूप का दर्शन कर पाएंगे। वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की विस्तृत कार्य योजना (DPR) पर काम अंतिम चरण में है। भूमि अधिग्रहण और शुरुआती ढांचागत सुधारों का काम बहुत जल्द जमीन पर दिखाई देने लगेगा। प्रशासन ने इस मेगा प्रोजेक्ट को समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है। माना जा रहा है कि अगले दो से तीन साल के भीतर यानी साल 2028-2029 तक यह जगन्नाथ कॉरिडोर पूरी तरह से बनकर देश और दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए समर्पित कर दिया जाएगा।

पुरी की तरह बनारस की जगन्नाथ रथयात्रा भी होगी और भव्य

वाराणसी के इस मंदिर का इतिहास बेहद अनूठा है, क्योंकि हर साल आषाढ़ महीने में यहां पुरी की ही तर्ज पर बेहद प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा निकाली जाती है, जो उत्तर भारत की सबसे बड़ी रथयात्राओं में से एक है। इस तीन दिवसीय पारंपरिक मेले और रथयात्रा के दौरान अस्सी और बेनियाबाग के इलाकों में लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। वर्तमान में मंदिर के आसपास के रास्ते काफी संकरे हैं, जिससे भक्तों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जगन्नाथ कॉरिडोर बनने के बाद सड़कों और रास्तों का चौड़ीकरण होगा, जिससे भविष्य में निकलने वाली भव्य रथयात्रा के दौरान भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने में प्रशासन को बड़ी मदद मिलेगी।

स्थानीय पर्यटन और बनारस की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बूस्ट

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद से बनारस आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका सीधा फायदा यहां के स्थानीय होटल, हस्तशिल्प और नाविक उद्योग को मिला है। अब जगन्नाथ कॉरिडोर के निर्माण से वाराणसी में धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) का एक नया केंद्र स्थापित होने जा रहा है। अस्सी और दुर्गाकुंड क्षेत्र के आसपास के स्थानीय जियोग्राफिकल और टूरिज्म मार्केट को इससे भारी बढ़ावा मिलेगा। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु अब न केवल बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा के दर्शन करेंगे, बल्कि वे भगवान जगन्नाथ के इस भव्य धाम का दीदार भी कर सकेंगे, जो बनारस की अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती प्रदान करेगा।

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