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प्लेन उड़ते ही अचानक क्यों चीखने-चिल्लाने और रोने लगते हैं छोटे बच्चे? जानिए टेकऑफ के समय काम आने वाले कुछ मैजिकल ट्रिक्स

हवाई जहाज में सफर करना बड़ों के लिए जितना रोमांचक और आरामदायक होता है, छोटे बच्चों और उनके माता-पिता के लिए कई बार यह उतना ही चुनौतीपूर्ण और तनावभरा साबित होने लगता है। अक्सर देखा गया है कि जैसे ही फ्लाइट उड़ान भरने (Takeoff) वाली होती है या फिर नीचे उतरने (Landing) की तैयारी करती है, शांत बैठे बच्चे भी अचानक जोर-जोर से चीखने, चिल्लाने और रोने लगते हैं। ऐसे समय में माता-पिता लाख कोशिशों के बाद भी बच्चे को चुप कराने में नाकाम साबित होते हैं, जिससे न केवल पैरेंट्स परेशान होते हैं बल्कि आस-पास बैठे अन्य यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों का इस तरह अचानक रोना उनकी किसी जिद का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक वजह छिपी हुई है। आइए एक खोजी रिपोर्टर की नजर से विस्तार से समझते हैं कि फ्लाइट में बच्चे क्यों रोते हैं और ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कौन सी जादुई पैरेंटिंग ट्रिक्स आपके बेहद काम आ सकती हैं।

जानिए क्यों रोते हैं बच्चे, क्या है कानों में होने वाले इस तेज दर्द का वैज्ञानिक कारण

हवाई सफर के दौरान बच्चों के रोने की सबसे मुख्य और बड़ी वजह है 'इयर बैरोट्रॉमा' (Ear Barotrauma), जिसे आम भाषा में कानों का ब्लॉक होना या पर्दा फटना जैसा महसूस होना कहते हैं। जब हवाई जहाज तेजी से ऊंचाई पर जाता है या नीचे की तरफ आता है, तो केबिन के भीतर वायुमंडलीय दबाव (Air Pressure) बहुत तेजी से बदलता है। हमारे कानों के भीतर एक पतली नली होती है जिसे 'यूस्टेशियन ट्यूब' (Eustachian Tube) कहा जाता है, जो अंदरूनी और बाहरी दबाव को बराबर रखने का काम करती है। बड़ों की तुलना में छोटे बच्चों की यह नली बेहद संकरी और अविकसित होती है, जिसके कारण वे इस दबाव के बदलाव को आसानी से झेल नहीं पाते। इस वजह से उनके कानों में अचानक असहनीय और बेहद तेज दर्द होने लगता है, जिसे वे बोलकर बता नहीं पाते और दर्द के मारे रोना शुरू कर देते हैं।

टेकऑफ और लैंडिंग के समय बहुत काम आएगी 'सकिंग और च्युइंग' की यह जादुई ट्रिक

इस समस्या से निपटने के लिए बाल रोग विशेषज्ञों और अनुभवी पैरेंट्स द्वारा सुझाई गई सबसे बेहतरीन और मैजिकल ट्रिक है बच्चों को कुछ चबाने या चूसने (Sucking or Chewing) के लिए देना। जब हम कुछ निगलते हैं, तो हमारे कानों की यूस्टेशियन ट्यूब खुल जाती है और कान के अंदर का दबाव सामान्य हो जाता है। इसलिए, जैसे ही फ्लाइट टेकऑफ या लैंडिंग करने वाली हो, अपने छोटे शिशु को ब्रेस्टफीड (स्तनपान) कराएं या बोतल से दूध/पानी पिलाएं। यदि बच्चा थोड़ा बड़ा है, तो आप उसे लॉलीपॉप, च्युइंग गम, टॉफी या उसका पसंदीदा स्नैक खाने के लिए दे सकते हैं। ऐसा करने से लगातार निगलने की प्रक्रिया चालू रहेगी और बच्चे के कानों में दर्द का अहसास बिल्कुल नहीं होगा।

सफर पर निकलने से पहले कॉटन बड्स और 'इयरप्लेन' प्लग का इंतजाम करना न भूलें

हवाई यात्रा को बच्चों के लिए पूरी तरह आरामदायक बनाने के लिए आपको अपने पास कुछ बेहद जरूरी चीजें पहले से तैयार रखनी चाहिए। उड़ान भरने से ठीक पहले बच्चे के कानों में रूई (Cotton Buds) के छोटे टुकड़े हल्के से डाल दें, जिससे तेज आवाज और हवा के दबाव का असर कम हो सके। इसके अलावा आजकल बाजारों और ऑनलाइन स्टोर्स पर बच्चों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए 'इयरप्लेन' (EarPlanes) या प्रेशर-फिल्टर्ड इयरप्लग्स मिलते हैं, जो केबिन के बदलते प्रेशर को कानों तक सीधे पहुंचने से रोकते हैं। इन छोटे-छोटे गैजेट्स की मदद से आप अपने बच्चे के नाजुक कानों को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं।

फ्लाइट के दौरान बच्चों का ध्यान भटकाना और हाइड्रेटेड रखना भी है बेहद जरूरी

कानों के दर्द के अलावा कई बार बच्चे नई जगह, अजनबी चेहरे और फ्लाइट की तेज गड़गड़ाहट को देखकर डर जाते हैं या बोर हो जाते हैं। इस मानसिक तनाव से बचाने के लिए अपने हैंड बैग में बच्चे के कुछ पसंदीदा खिलौने, रंग-बिरंगी किताबें या कोई नया गैजेट जरूर रखें, जिससे मुश्किल समय में उनका ध्यान आसानी से भटकाया जा सके। इसके साथ ही हवा में नमी की कमी के कारण बच्चों का गला जल्दी सूखता है और वे चिड़चिड़े हो जाते हैं, इसलिए सफर के दौरान उन्हें थोड़ी-थोड़ी देर में पानी या जूस पिलाकर पूरी तरह हाइड्रेटेड रखें। यात्रा के दौरान बच्चों के सोने के समय (Nap Time) के अनुसार फ्लाइट टिकट बुक करना भी एक बेहद स्मार्ट पैरेंटिंग हैक माना जाता है, क्योंकि सोता हुआ बच्चा इस पूरे प्रेशर चेंज से पूरी तरह बेअसर रहता है।

 

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