लास्ट लैंड ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर है यह रहस्यमयी जगह, हर ट्रैवलर को एक बार जरूर करना चाहिए दीदार

लास्ट लैंड ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर है यह रहस्यमयी जगह, हर ट्रैवलर को एक बार जरूर करना चाहिए दीदार

अगर आपको ऐसी जगहों की तलाश रहती है जहां इतिहास, रोमांच और प्रकृति का अद्भुत मेल देखने को मिले, तो तमिलनाडु के छोर पर स्थित धनुषकोडी (Dhanushkodi) आपकी अगली ड्रीम ट्रैवल डिस्टिनेशन होनी चाहिए। भारत के आखिरी छोर पर बसी इस जादुई जगह को दुनिया 'लास्ट लैंड ऑफ इंडिया' यानी भारत की अंतिम भूमि के नाम से जानती है। तीन तरफ से समंदर से घिरे इस स्थान पर पैर रखते ही एक अलग ही दुनिया का अहसास होता है, जहां की खामोशी और प्राकृतिक सुंदरता सैलानियों को अपनी ओर खींच लेती है। अगर आप भी किसी शांत, खूबसूरत और ऐतिहासिक ट्रिप की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह जगह आपके लिए एकदम परफेक्ट है।

क्यों कहा जाता है इसे 'लास्ट लैंड ऑफ इंडिया' और क्या है इसका इतिहास

तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप के आखिरी कोने पर स्थित धनुषकोडी को भारत का आखिरी छोर माना जाता है, जिसके आगे केवल हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी का असीम विस्तार नजर आता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यही वह पवित्र स्थान है जहां से भगवान श्री राम ने रावण की लंका तक पहुंचने के लिए 'रामसेतु' (ऐडम ब्रिज) का निर्माण किया था। हालांकि, साल 1964 में आए एक भयानक चक्रवात ने इस हंसते-खेलते और व्यस्त शहर को पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया था, जिसके बाद सरकार ने इसे रहने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। आज भी यहां मौजूद खंडहर, टूटा हुआ चर्च और रेलवे स्टेशन उस दर्दनाक रात की कहानी बयां करते हैं, यही वजह है कि इसे कई लोग एक रहस्यमयी या 'घोस्ट टाउन' के रूप में भी जानते हैं।

धनुषकोडी जाने का सबसे सही समय और रूट

यदि आप इस ऑफबीट और एडवेंचर से भरपूर जगह की यात्रा करना चाहते हैं, तो अक्टूबर से मार्च के बीच का समय सबसे बेहतरीन माना जाता है, क्योंकि इस दौरान यहां का मौसम बेहद सुहाना और घूमने लायक होता है। यहां पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले तमिलनाडु के रामेश्वरम पहुंचना होगा, जो सड़क और रेल मार्ग से देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। रामेश्वरम से धनुषकोडी की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है, और पंबन ब्रिज से आगे का यह सफर दोनों तरफ नीले पानी के बीच बनी शानदार सड़क से तय होता है, जो आपकी पूरी थकान चुटकियों में दूर कर देगा।

जानिए इस ट्रिप में कितना आएगा कुल खर्च

धनुषकोडी की यह यात्रा बजट के लिहाज से भी काफी किफायती साबित हो सकती है। अगर आप रामेश्वरम से आगे लोकल शेयरिंग जीप या कैब के जरिए धनुषकोडी और 'अरिचल मुनई' (अ अंतिम पॉइंट) तक जाते हैं, तो ट्रांसपोर्ट का खर्च बहुत ज्यादा नहीं आता। सामान्य तौर पर यदि आप ट्रेन या बस से रामेश्वरम पहुंचते हैं और वहां से लोकल ट्रैवल करते हैं, तो दो-तीन दिन के इस ट्रिप में रहना, खाना और घूमना मिलाकर प्रति व्यक्ति लगभग ₹5,000 से ₹8,000 के खर्च में यह शानदार सफर आसानी से पूरा हो जाता है। प्रकृति प्रेमियों और इतिहास के पन्नों को टटोलने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रिप जिंदगीभर का एक कभी न भूलने वाला अनुभव साबित होगा।

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