हिमालय की गोद में बसे हैं ये बेहद खूबसूरत गांव, बिना कठिन ट्रेकिंग के लें बर्फीली ऊंचाइयों का असली मजा
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की ऊंची-ऊंची पहाड़ियों का नाम सुनते ही सबसे पहले जेहन में कठिन चढ़ाई, लंबे ट्रेकिंग रूट्स और भारी सामान लादकर चलने की तस्वीरें उभरने लगती हैं। कई बार लोग उम्र, सेहत या समय की कमी के कारण पहाड़ों की असली सुंदरता का लुत्फ उठाने से महरूम रह जाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि बिना ट्रेक किए हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंचना मुमकिन नहीं है। लेकिन अगर आप भी बिना किसी शारीरिक थकान या लंबी पैदल यात्रा के सीधे बादलों के बीच पहुंचना चाहते हैं, तो हिमालय की गोद में बसे ये जादुई और खूबसूरत गांव आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। सड़क मार्ग से सीधे जुड़े ये ऑफबीट ठिकाने कम मेहनत में आपको जिंदगी भर का यादगार अनुभव देने के लिए बिल्कुल तैयार हैं।
चोपता और तुंगनाथ से हटकर जानिए लंगसी और मक्कूमठ जैसे अनजान ठिकाने
उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में स्थित कई ऐसे गांव हैं जो अपनी प्राकृतिक भव्यता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन वहां सैलानियों की भारी भीड़ नहीं पहुंच पाती। आमतौर पर लोग चोपता पहुंचकर तुंगनाथ का कठिन ट्रेक करते हैं, लेकिन अगर आप बिना ट्रेकिंग के हिमालय के विशाल नजारों का आनंद लेना चाहते हैं, तो चोपता से पहले आने वाले छोटे-छोटे और मनमोहक गांवों का रुख कर सकते हैं। इन जगहों पर वाहन सीधे आपके होटल या होमस्टे के दरवाजे तक पहुंच जाते हैं और खिड़की खोलते ही विशाल बर्फ से ढकी चोटियां आपका स्वागत करती हैं। यहाँ की शांत आबोहवा और स्थानीय संस्कृति पर्यटकों को एक अलग ही मानसिक सुकून देती है।
सांगला और छिटकुल: हिमाचल की हसीन वादियों में बिना थके बिताएं सुकून के पल
हिमाचल प्रदेश की किन्नौर घाटी में स्थित सांगला और भारत का आखिरी छोर कहे जाने वाले छिटकुल गांव तक पहुंचने के लिए आपको किसी तरह की मुश्किल ट्रेकिंग करने की जरूरत नहीं है। बस और कैब जैसी बेहतरीन सड़क सुविधाओं के जरिए आप सीधे इन अद्भुत वादियों के बीचोंबीच पहुंच सकते हैं। बहती हुई बासपा नदी का कलकल करता पानी, सेब के लदे हुए बाग और लकड़ी के बने पारंपरिक पहाड़ी मकान इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। यहाँ आप बिना किसी भागदौड़ या थकान के प्रकृति की गोद में बैठकर गर्म चाय की चुस्की के साथ पहाड़ों के असली सौंदर्य को महसूस कर सकते हैं।
ऑफबीट ट्रैवलर्स के लिए क्यों खास हैं ये रोड-कनेक्टिविटी वाले पहाड़ी गांव
आज के समय में जब लोकप्रिय हिल स्टेशनों पर पर्यटकों का भारी रेला लगा रहता है और गाड़ियां ट्रैफिक जाम में फंसी रहती हैं, तब ये छोटे और सुलभ गांव एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रहे हैं। यहाँ न तो प्रदूषण का शोर है और न ही शहर जैसी भागदौड़। आप अपनी गाड़ी से या आसानी से मिलने वाली टैक्सी से सीधे इन लोकेशंस पर पहुंचकर स्थानीय होमस्टे में ठहर सकते हैं। उत्तराखंड और हिमाचल के इन छिपे हुए नगीनों की यात्रा आपके वीकेंड को बिना किसी शारीरिक थकान के बेहद आरामदायक और यादगार बना देगी, जहाँ आप प्रकृति के सबसे करीब खुद को महसूस करेंगे।