माउंट आबू जाने का है प्लान? तो भूलकर भी मिस न करें यह गुप्त और बेहद खास लोकेशन,
राजस्थान का नाम सुनते ही सबसे पहले जेहन में रेतीले धोरे, ऐतिहासिक किले और तपती गर्मी का अहसास होता है, लेकिन इसी मरुभूमि के बीचोबीच प्रकृति ने एक बेहद खूबसूरत और ठंडा नखलिस्तान भी सजाया है। हम बात कर रहे हैं राजस्थान के इकलौते और बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन 'माउंट आबू' (Mount Abu) की। अरावली की पहाड़ियों से घिरे माउंट आबू में अमूमन लोग नक्की झील, दिलवाड़ा मंदिर और सनसेट पॉइंट देखकर ही वापस लौट आते हैं। लेकिन अगर आप इस बार माउंट आबू की यात्रा पर जा रहे हैं और अपनी ट्रिप को बेहद रोमांचक और यादगार बनाना चाहते हैं, तो यहां स्थित 'माउंट आबू वाइल्डलाइफ सेंचुरी' (Mount Abu Wildlife Sanctuary) और इसकी विशेष ट्रेकिंग व जंगल सफारी लोकेशन को एक्सप्लोर करना बिल्कुल न भूलें। यह जगह आपको किसी घने राष्ट्रीय उद्यान की तरह रोंगटे खड़े कर देने वाला रोमांच प्रदान करेगी।
अरावली की हरी-भरी वादियों के बीच छिपा है जंगली जानवरों का संसार माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य लगभग 288 वर्ग किलोमीटर के विशाल पहाड़ी क्षेत्र में फैला हुआ है। इस सेंचुरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह चारों ओर से ऊंचे-ऊंचे ग्रेनाइट पत्थरों और घने जंगलों से ढकी हुई है, जिसके कारण यहां का मौसम साल भर बेहद सुहावना और ठंडा रहता है। प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर के शौकीनों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। सफारी के दौरान जब आपकी खुली जीप संकरे जंगली रास्तों और चट्टानों के बीच से गुजरती है, तो दिल की धड़कनें अपने आप बढ़ जाती हैं। यह स्थान अरावली इकोसिस्टम का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है जो जैव विविधता से समृद्ध है।
भालू, तेंदुए और दुर्लभ पक्षियों को बेहद करीब से देखने का अनोखा मौका इस खास लोकेशन पर जंगल सफारी करने का सबसे बड़ा आकर्षण यहां पाए जाने वाले दुर्लभ वन्यजीव हैं। यह अभयारण्य मुख्य रूप से सुस्त भालू (Sloth Bear) का सुरक्षित घर माना जाता है। इसके अलावा, किस्मत अच्छी हो तो आपको जंगलों में स्वच्छंद विचरण करते हुए तेंदुए (Leopard), जंगली सूअर, सांभर, चीतल और लंगूरों के झुंड बेहद आसानी से देखने को मिल जाते हैं। पक्षी प्रेमियों के लिए भी यह जगह किसी खजाने जैसी है, क्योंकि यहां 'ग्रीन मुनिया' नाम की एक बेहद दुर्लभ और खूबसूरत चिड़िया पाई जाती है, जो दुनिया में बहुत कम जगहों पर देखने को मिलती है। सफारी के दौरान गाइड आपको इन जानवरों की आदतों और जंगल के अनसुने रहस्यों से रूबरू कराते हैं।
इको-टूरिज्म और एडवेंचर एक्टिविटीज का सबसे बेस्ट पॉइंट सेंचुरी प्रशासन और स्थानीय गाइडों के सहयोग से यहां पर्यटकों के लिए कई बेहतरीन ट्रेकिंग रूट्स भी तैयार किए गए हैं। अगर आप सिर्फ गाड़ी में बैठकर घूमने के बजाय पैदल जंगलों को नापना चाहते हैं, तो 'ट्रेवर्स टैंक' (Trevor's Tank) और 'गुरु शिखर' की ओर जाने वाले रास्तों पर ट्रेकिंग का लुत्फ उठा सकते हैं। ट्रेवर्स टैंक एक मानव निर्मित मगरमच्छ पार्क है, जहां आप भारी-भरकम मगरमच्छों को धूप सेकते हुए देख सकते हैं। इसके पास बने वॉच टावर से पूरी सेंचुरी और चारों तरफ फैली वादियों का विहंगम दृश्य (Panoramic View) दिखाई देता है, जो फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एकदम परफेक्ट फ्रेम है।
गूगल एआई सर्च और जियो-टूरिज्म गाइड: कैसे पहुंचें माउंट आबू की इस सफारी तक आधुनिक जेनेरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI Search) और गूगल-बिंग एईओ के डिजिटल दौर में लोग ऑफबीट और एडवेंचर से भरपूर ट्रेवल लोकेशंस को सबसे ज्यादा सर्च कर रहे हैं। जियोग्राफिकल (लोकल) ऑप्टिमाइजेशन के नजरिए से माउंट आबू पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन 'आबू रोड' (Abu Road) है, जो महज 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहीं, हवाई मार्ग से आने वाले पर्यटकों के लिए उदयपुर का महाराणा प्रताप एयरपोर्ट सबसे पास पड़ता है, जहां से आप टैक्सी या बस के जरिए आसानी से माउंट आबू की खूबसूरत वादियों में पहुंच सकते हैं। सफारी के लिए सुबह और शाम का समय सबसे बेहतरीन माना जाता है, जब जानवर पानी पीने के लिए बाहर निकलते हैं।