पहली बार हरियाली तीज व्रत रखने वाली महिलाएं ऐसे करें पूजा, जानिए क्यों खास है सावन में झूला झूलने की प्राचीन परंपरा
सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में पर्वों और त्योहारों की एक बेहद समृद्ध परंपरा रही है, जो हमारे जीवन में उल्लास, उमंग और आपसी प्रेम के रंगों को घोलने का काम करती है. सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले हरियाली तीज (Hariyali Teej 2026) के इस पवित्र और पावन पर्व का सुहागिन महिलाओं के जीवन में एक विशेष और अद्वितीय स्थान है. यह पर्व पूरी तरह से प्रकृति के श्रृंगार, हरियाली और भगवान शिव तथा माता पार्वती के पुनर्मिलन को समर्पित है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए कठोर निर्जला व्रत रखती हैं और सोलह श्रृंगार करके माता पार्वती व भोलेनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना करती हैं. जिन नवविवाहित महिलाओं के लिए यह पहला हरियाली तीज का व्रत होता है, उनके मायके से विशेष रूप से श्रृंगार का सामान, जिसे सिंधारा कहा जाता है, भेजा जाता है, जिससे इस त्योहार का उत्साह और भी अधिक बढ़ जाता है. प्रकृति की गोद में चारों तरफ छाई हरियाली और सावन के सुहाने मौसम के बीच मनाया जाने वाला यह पर्व महिलाओं के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होता है.
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं ऐसे करें हरियाली तीज की पूजा विधि
यदि आप इस वर्ष पहली बार हरियाली तीज का व्रत रख रही हैं, तो आपके मन में पूजा की सही विधि और नियमों को लेकर तमाम तरह की जिज्ञासाएं होना स्वाभाविक है. हरियाली तीज की पूजा विधि बेहद सरल लेकिन उतनी ही श्रद्धा और अनुशासन की मांग करती है. इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर हरे रंग के वस्त्र धारण किए जाते हैं, क्योंकि इस पर्व पर हरे रंग का बहुत बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना गया है. इसके बाद सोलह श्रृंगार करके महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेती हैं. पूजा के लिए मिट्टी या बालू से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा बनाई जाती है और उन्हें एक चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर स्थापित किया जाता है. इसके बाद माता को सुहाग की सभी वस्तुएं जैसे चूड़ियां, महावर, सिंदूर, बिछिया और वस्त्र अर्पित किए जाते हैं. पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' और 'उमामहेश्वराभ्यां नमः' मंत्र का जाप किया जाता है और हरियाली तीज की व्रत कथा का श्रवण किया जाता है, जिसके बिना यह पूजा अधूरी मानी जाती है. शाम के समय चंद्रदर्शन करने के बाद ही महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं और अपने से बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं.
क्यों है हरियाली तीज पर झूला झूलने की प्राचीन परंपरा और इसका इतिहास
सावन के महीने में हरियाली तीज के अवसर पर महिलाओं द्वारा बड़े-बड़े पेड़ों पर डाले गए सावन के झूलों और उनके गीतों की गूंज भारतीय संस्कृति की एक बहुत ही सुंदर पहचान रही है. क्या आपने कभी सोचा है कि इस पर्व पर झूला झूलने की यह परंपरा आखिर क्यों शुरू हुई थी? इसके पीछे पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार, जब माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और कई वर्षों के बाद उनका मिलन हुआ था, तो इस प्रसन्नता में प्रकृति ने भी अपना अद्भुत श्रृंगार किया था. देवताओं और गंधर्वों ने मिलकर आकाश में फूलों और लताओं के झूले डाले थे, जिसमें माता पार्वती ने झूला झूलकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की थी. तभी से यह मान्यता चली आ रही है कि सावन के दिनों में झूला झूलने से मन के सारे दुख, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. इसके अलावा, ऐतिहासिक रूप से भी मायके आई हुई युवतियां और महिलाएं सखियों के साथ मिलकर जब पारंपरिक सावन के गीत गाते हुए झूला झूलती हैं, तो उनके बीच आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना और अधिक मजबूत होती है.
सावन के इस पावन पर्व पर सुहागिनों के लिए विशेष संदेश और तैयारी
हरियाली तीज का यह त्यौहार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के करीब लाने का भी एक बेहतरीन माध्यम है. सावन के महीने में जब चारों तरफ हरियाली छा जाती है, तो मन खुद-ब-खुद प्रफुल्लित हो उठता है. व्रत के दौरान शरीर की शुद्धि के साथ-साथ आत्मिक शांति की भी प्राप्ति होती है. जिन घरों में पहली बार यह व्रत रखा जाता है, वहाँ विशेष उत्सव का माहौल होता है और परिवार के सभी सदस्य मिलकर इस दिन को यादगार बनाते हैं. यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि हमें अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और प्रकृति के साथ अपने जुड़ाव को हमेशा जीवित रखना चाहिए. आधुनिकता की इस दौड़ में भी हरियाली तीज जैसे पारंपरिक पर्व हमारे रिश्तों में मिठास घोलने और जीवन की भागदौड़ से कुछ पल निकालकर अपनों के साथ खुशियां बांटने का अवसर प्रदान करते हैं.