Shani Vakri 2026: 27 जुलाई से शनि देव चलेंगे उल्टी चाल, मेष-तुला समेत इन 5 राशियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, तुरंत आजमाएं ये उपाय

Shani Vakri 2026: 27 जुलाई से शनि देव चलेंगे उल्टी चाल, मेष-तुला समेत इन 5 राशियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, तुरंत आजमाएं ये उपाय

लखनऊ। वैदिक ज्योतिष में शनि देव को न्याय और कर्मफल का दाता माना गया है। नवग्रहों में शनि सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं, इसलिए जब भी वे अपनी चाल बदलते हैं, तो उसका गहरा और व्यापक असर सभी 12 राशियों के जीवन पर देखने को मिलता है। टीवी9 हिंदी की एक विशेष ज्योतिषीय रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 का एक सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ग्रह गोचर 27 जुलाई 2026 को होने जा रहा है, जब शनि देव वक्री (Saturn Retrograde) यानी उल्टी चाल चलना शुरू करेंगे।

ज्योतिष आचार्यों का मानना है कि शनि की इस टेढ़ी या वक्री चाल का प्रभाव इसके शुरू होने से कुछ दिन पहले ही महसूस होने लगता है। इस दौरान लोगों को अपने करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक रिश्तों में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 27 जुलाई से शुरू हो रही शनि की वक्री चाल के कारण मेष और तुला सहित 5 विशेष राशियों के जातकों को बेहद सतर्क रहने और संभलकर कदम बढ़ाने की सलाह दी गई है, क्योंकि उन्हें इस अवधि में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

शनि की वक्री चाल का क्या है मतलब?

खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से वक्री होने का मतलब यह कतई नहीं है कि शनि वास्तव में अंतरिक्ष में पीछे की ओर भागने लगते हैं। दरअसल, पृथ्वी और शनि की गति में अंतर होने के कारण धरती से देखने पर ऐसा आभास होता है कि शनि देव पीछे की ओर चल रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि की इस वक्री अवधि को 'कठिन आत्ममंथन, धैर्य की परीक्षा और कर्मों की समीक्षा' का समय माना गया है।

इन 5 राशियों को रहना होगा 'रेड अलर्ट' पर, बढ़ सकती हैं परेशानियां:

  • 1. मेष राशि (Aries): शनि की वक्री चाल के प्रभाव से मेष राशि के नौकरीपेशा लोगों पर काम का दबाव (Work Pressure) अचानक बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। इस दौरान किसी भी महत्वपूर्ण व्यावसायिक या व्यक्तिगत मामले में जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें। पैसों के लेन-देन और निवेश के मामलों में अत्यधिक सावधानी बरतें, अन्यथा धन हानि हो सकती है।

  • 2. कर्क राशि (Cancer): कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और परिवार के बीच संतुलन (Balance) बनाने में कठिनाई पैदा कर सकता है। कार्यक्षेत्र में अनचाही अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। इस अवधि में किसी भी तरह के वाद-विवाद, बहस या कानूनी झमेले से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें और अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखें।

  • 3. तुला राशि (Libra): तुला राशि वाले जातकों के फिजूलखर्चों में अचानक भारी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बजट बिगड़ सकता है। यदि आप किसी बड़े प्रोजेक्ट या शेयर बाजार में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो विशेषज्ञों की सलाह के बिना आगे न बढ़ें। नौकरी में सहकर्मियों या किसी बाहरी व्यक्ति पर आंख बंद करके भरोसा करना भारी पड़ सकता है।

  • 4. मकर राशि (Capricorn): चूंकि शनि देव मकर राशि के ही स्वामी हैं, इसलिए उनकी इस चाल का सबसे ज्यादा और सीधा असर इस राशि पर देखने को मिलेगा। मकर राशि वालों के बनते हुए कार्यों में बेवजह की देरी (Delays) हो सकती है और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। ऐसे समय में धैर्य बनाए रखना ही सफलता की एकमात्र कुंजी होगी।

  • 5. मीन राशि (Pisces): मीन राशि के जातकों को इस गोचर के दौरान अत्यधिक मानसिक तनाव और अज्ञात भय की समस्या हो सकती है। पुराने कानूनी या पारिवारिक विवाद दोबारा उभरकर सामने आ सकते हैं, जिससे चिंता बढ़ेगी। कोई भी नया व्यापार शुरू करने या बड़ा वित्तीय जोखिम लेने के लिए यह समय अनुकूल नहीं है।

शनि के प्रकोप और कष्टों से बचने के 4 अचूक ज्योतिषीय उपाय:

यदि आपकी राशि भी इन 5 प्रभावित राशियों में शामिल है, तो शनि देव के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए ज्योतिषियों ने ये सरल उपाय बताए हैं:

  • शनिवार का व्रत और दान: प्रत्येक शनिवार को शनि देव के मंदिर जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। काले तिल, काली उड़द की दाल, छाता या लोहे की वस्तुओं का किसी जरूरतमंद को दान करें।

  • हनुमान चालीसा का पाठ: शनि देव परम हनुमान भक्त हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करता है, शनि देव उसे कभी प्रताड़ित नहीं करते।

  • महामृत्युंजय मंत्र का जाप: प्रतिदिन सुबह या शाम को भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और सभी ग्रह दोष शांत होते हैं।

  • कर्मों में शुचिता: शनि देव न्याय के देवता हैं, इसलिए इस अवधि में किसी भी गरीब, असहाय, मजदूर या बेजुबान जानवर को परेशान न करें। ईमानदारी से अपना काम करें, जिससे शनि देव स्वतः शुभ फल देने लगेंगे।

 

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