Mysterious Temples of India: चूहों का धाम या पाताल से जुड़ा शिवलिंग? भारत के 5 रहस्यमयी मंदिर जिनके आगे विज्ञान भी नतमस्तक
भारत केवल आस्था और धर्म का केंद्र नहीं है, बल्कि यह प्राचीन स्थापत्य कला और ऐसे अनसुलझे रहस्यों की भूमि भी है जिन्हें आज का आधुनिक विज्ञान भी पूरी तरह से समझने में असमर्थ रहा है। देश में कई ऐसे ऐतिहासिक मंदिर मौजूद हैं, जिनकी संरचना, प्राकृतिक घटनाएं और चमत्कारी मान्यताएं किसी को भी हैरान कर देती हैं। कहीं हजारों चूहों का राज है, तो कहीं बिना नींव के सैकड़ों टन वजनी पत्थर हवा में टिके हैं।
1. करणी माता मंदिर (देशनोक, राजस्थान): 25,000 चूहों का अनोखा धाम
राजस्थान के बीकानेर से करीब 30 किलोमीटर दूर देशनोक में स्थित करणी माता का मंदिर दुनियाभर में 'चूहों वाले मंदिर' के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर प्रांगण में लगभग 25,000 काले चूहे (जिन्हें 'काबा' कहा जाता है) स्वच्छंद रूप से घूमते हैं।
सबसे बड़ा रहस्य यह है कि मंदिर में हजारों चूहों के खुलेआम घूमने और भक्तों द्वारा उनका जूठा किया हुआ प्रसाद खाने के बावजूद आज तक यहां कभी प्लेग या कोई संक्रामक बीमारी नहीं फैली। मंदिर में सफेद चूहे का दिखना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिसे स्वयं करणी माता का साक्षात स्वरूप माना गया है।
2. अचलेश्वर महादेव मंदिर (धौलपुर, राजस्थान): दिन में तीन रंग बदलने वाला शिवलिंग
राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर धौलपुर के पास स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के सबसे अनोखे धामों में से एक है। इस मंदिर में स्थापित प्राचीन शिवलिंग दिनभर में तीन बार अपना रंग बदलता है।
सुबह के समय यह शिवलिंग लाल रंग का दिखाई देता है, दोपहर में इसका रंग केसरिया हो जाता है और शाम होते-होते यह गहरे सांवले या गेहूंए रंग में बदल जाता है। भूवैज्ञानिकों ने पत्थरों की संरचना और सूर्य की किरणों के अपवर्तन पर कई शोध किए, लेकिन इस रंग परिवर्तन का कोई ठोस वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं निकल सका। इसके अलावा, शिवलिंग का निचला सिरा पाताल लोक से जुड़ा माना जाता है, जिसकी गहराई नापने की कई कोशिशें आज तक नाकाम रही हैं।
3. लेपाक्षी मंदिर (आंध्र प्रदेश): हवा में झूलता हुआ खंभा (Hanging Pillar)
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित 16वीं सदी का वीरभद्र (लेपाक्षी) मंदिर अपनी विजयनगर वास्तुकला और रहस्यमयी 'हैंगिंग पिलर' के लिए विश्वविख्यात है।
मंदिर परिसर में कुल 70 विशालकाय नक्काशीदार पत्थर के खंभे हैं, जिनमें से एक खंभा जमीन को बिल्कुल नहीं छूता और पूरी तरह हवा में लटका हुआ है। ब्रिटिश शासनकाल में एक इंजीनियर ने इस खंभे के रहस्य को समझने के लिए इसे हिलाने की कोशिश की थी, जिससे पूरा मंदिर ढांचा हिलने लगा था। मान्यता है कि इस खंभे के नीचे से कपड़ा निकालने पर घर में सुख-समृद्धि आती है।
4. जगन्नाथ पुरी मंदिर (ओडिशा): हवा के विपरीत लहराता ध्वज और मौन समुद्र
चार धामों में से एक ओडिशा का जगन्नाथ मंदिर चमत्कारों की खान माना जाता है। इस मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज (पतित पावन) हमेशा हवा की दिशा के विपरीत लहराता है।
इसके अलावा, मंदिर के शीर्ष पर स्थित 20 फीट ऊंचा और कई टन भारी 'सुदर्शन चक्र' शहर के किसी भी कोने से देखने पर हमेशा आपकी तरफ ही मुंह किए हुए दिखाई देता है। मंदिर के सिंहद्वार के अंदर कदम रखते ही बाहर की विशाल समुद्र की लहरों की आवाज पूरी तरह गायब हो जाती है, जबकि एक कदम बाहर आते ही गर्जना फिर सुनाई देने लगती है।
5. कैलास मंदिर (एलोरा, महाराष्ट्र): ऊपर से नीचे तराशा गया अखंड पाषाण विस्मय
महाराष्ट्र के औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) में स्थित एलोरा की गुफा संख्या 16 में बना कैलास मंदिर मानव इतिहास की सबसे जटिल और रहस्यमयी स्थापत्य कला का उदाहरण है। इस पूरे दो मंजिला विशाल मंदिर को नीचे से ऊपर नहीं, बल्कि एक ही विशालकाय ठोस पहाड़ को ऊपर से नीचे की तरफ काटकर (Top-to-Bottom Carving) बनाया गया है।
पुरातत्वविदों के अनुसार, इसे बनाने के लिए लगभग 2 से 4 लाख टन पत्थर को काटा गया था। 8वीं शताब्दी में बिना किसी आधुनिक क्रेन, लेजर तकनीक या कंप्यूटर मॉडलिंग के इतने सटीक अनुपातिक मंदिर का निर्माण करना आज के अत्याधुनिक इंजीनियरिंग युग में भी लगभग असंभव माना जाता है।