राजस्थान हाईकोर्ट : OBC आयोग की रिपोर्ट आए या नहीं, 15 अगस्त तक हर हाल में पूरी करें आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया

राजस्थान हाईकोर्ट : OBC आयोग की रिपोर्ट आए या नहीं, 15 अगस्त तक हर हाल में पूरी करें आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया

राजस्थान की राजनीति और स्थानीय निकायों के चुनावों से जुड़ी इस वक्त की सबसे बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक विभागों को एक बेहद सख्त निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया को हर हाल में 15 अगस्त तक पूरा किया जाए। अदालत के इस कड़े रुख से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि लंबे समय से रिपोर्ट के अभाव में अटकी चुनाव प्रक्रियाओं के कारण राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई थी। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब राज्य में चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है और राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।

ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के इंतजार में अटकी थी प्रक्रिया

अक्सर यह देखा जाता है कि विभिन्न स्थानीय निकायों और त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में वार्डों के आरक्षण और सीटों के निर्धारण को लेकर ओबीसी आयोग के आंकड़ों और रिपोर्ट का इंतजार किया जाता है, जिसके चलते चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पाती। इसी देरी के मामलों को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने दो टूक कह दिया है कि प्रशासनिक काम में और अधिक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत का यह फैसला यह सुनिश्चित करने के लिए आया है कि लोकतंत्र की सबसे निचली इकाइयों में समय पर चुनाव संपन्न हों और जनता को उनका स्थानीय प्रतिनिधि चुनने का अधिकार तय समय सीमा के भीतर मिल सके।

15 अगस्त की डेडलाइन तय, प्रशासनिक अमला हुआ अलर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा डेडलाइन तय किए जाने के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज तथा स्वायत्त शासन विभाग पर तेजी से काम करने का भारी दबाव आ गया है। अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है क्योंकि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी जिलों में रोटेशन और आरक्षण की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। सरकार को अब हर हाल में तय तारीख से पहले इस पूरी प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाना होगा, अन्यथा इसे अदालत के आदेश की अवमानना माना जा सकता है। इस निर्देश के बाद से प्रशासनिक गलियारों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है और युद्ध स्तर पर फाइलों को खंगाला जा रहा है।

राजनीतिक दलों की बढ़ी धड़कनें, चुनावी तैयारियों ने पकड़ा जोर

अदालत के इस कड़े आदेश और 15 अगस्त की समय सीमा तय होने से राजस्थान के सभी राजनीतिक दलों—चाहे वह सत्ताधारी दल हो या मुख्य विपक्ष—की सरगर्मी अचानक बढ़ गई है। जैसे ही सीटों का आरक्षण फाइनल होगा, वैसे ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होने वाली है। टिकट के दावेदारों और संभावित उम्मीदवारों ने अपने-अपने इलाकों में गणित लगाना शुरू कर दिया है। आने वाले कुछ हफ्तों में राजस्थान का सियासी पारा काफी हाई रहने की पूरी उम्मीद है, क्योंकि स्थानीय निकाय चुनावों का यह रण अब बेहद करीब आ चुका है।

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