बूंदी में अवैध निर्माणों पर गरजा प्रशासन का पीला पंजा, 25 से अधिक अतिक्रमण धराशायी होने से बदली शहर की तस्वीर

बूंदी में अवैध निर्माणों पर गरजा प्रशासन का पीला पंजा, 25 से अधिक अतिक्रमण धराशायी होने से बदली शहर की तस्वीर

राजस्थान के ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण शहर बूंदी में जिला प्रशासन और नगर परिषद की ओर से एक बहुत बड़ा और सख्त अभियान चलाया गया है। शहर के भीतर लंबे समय से सरकारी जमीनों, मुख्य सड़कों और सार्वजनिक मार्गों पर किए गए अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ प्रशासन का पीला पंजा पूरी आक्रामकता के साथ गरजा है। इस बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने विभिन्न इलाकों में फैले 25 से अधिक अवैध अतिक्रमणों को पूरी तरह से बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया है। जिला प्रशासन के इस सख्त एक्शन से अवैध कब्जाधारियों और भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है, वहीं शहर की आम जनता और दुकानदारों ने प्रशासन के इस कदम की सराहना की है। वर्षों से ट्रैफिक जाम और अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहे इस शहर की सूरत अब इस कार्रवाई के बाद काफी हद तक बदलती हुई नजर आ रही है। आइए इस विस्तृत लेख में जानते हैं कि बूंदी प्रशासन के इस मेगा एंटी-एनक्रोचमेंट ड्राइव के पीछे की मुख्य वजहें क्या थीं और इससे शहर को क्या-क्या बड़े फायदे मिलने वाले हैं।

अवैध अतिक्रमणों के कारण गंभीर होती जा रही थी शहर की समस्या

बूंदी शहर के मुख्य बाजारों, व्यस्त चौराहों और ऐतिहासिक धरोहरों के आसपास पिछले कुछ वर्षों में अवैध अतिक्रमणों की समस्या लगातार विकराल रूप धारण करती जा रही थी। लोगों ने दुकानों के बाहर अवैध रूप से टीनशेड, पक्के चबूतरे और रैंप बनाकर सड़कों के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था, जिसके कारण सड़कों की चौड़ाई सिमट कर रह गई थी। स्थिति यह हो गई थी कि शहर के मुख्य मार्गों से गुजरने वाले राहगीरों, स्कूली बच्चों और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन गाड़ियों को भी भारी ट्रैफिक जाम और दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों द्वारा लगातार जिला प्रशासन को इन अवैध कब्जों की शिकायतें सौंपी जा रही थीं, जिसके बाद नगर परिषद और जिला कलेक्टर के निर्देश पर यह संयुक्त रूप से बड़ा और निर्णायक अभियान चलाने का खाका तैयार किया गया।

प्रशासन का पीला पंजा: 25 से अधिक पक्के और कच्चे अतिक्रमण ध्वस्त

जिला प्रशासन, नगर परिषद के दस्ते और भारी पुलिस बल के साथ सुबह-सुबह बूंदी के विभिन्न चिन्हित इलाकों में अचानक पहुंचा। प्रशासन की इस टीम ने बिना किसी देरी के अवैध निर्माणों और कब्जों को हटाना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान मुख्य बाजारों और सड़कों के किनारे बने 25 से अधिक अवैध निर्माणों, दुकानों के आगे बढ़ाए गए हिस्सों और अस्थाई थड़ियों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया। विरोध की आशंका को देखते हुए मौके पर भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे। हालांकि प्रशासन की इस कड़ी सख्ती के आगे किसी भी अतिक्रमणकारी की दाल नहीं गल सकी और देखते ही देखते कई सालों से कब्जाई गई बेशकीमती सरकारी जमीन को पूरी तरह से मुक्त करवा लिया गया।

शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और सुंदरता में सुधार की उम्मीद

अतिक्रमण हटने के बाद बूंदी शहर के मुख्य मार्गों और चौराहों पर काफी खुलापन देखने को मिल रहा है, जिससे लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिली है। यातायात सुगम होने से अब आम नागरिकों और पर्यटकों को आवाजाही में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। बूंदी एक ऐतिहासिक पर्यटन नगरी है, जहां देश-विदेश से हजारों सैलानी घूमने आते हैं। ऐसे में शहर के रास्ते साफ और सुंदर होने से पर्यटकों पर भी एक बहुत ही सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो लोग दोबारा अतिक्रमण करने की कोशिश करेंगे, उनके खिलाफ भारी आर्थिक जुर्माना लगाने के साथ-साथ आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जाएंगे।

स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

प्रशासन के इस बुलडोजर एक्शन के बाद शहर में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां आम जनता, पैदल चलने वाले यात्रियों और बुद्धिजीवियों ने प्रशासन के इस कदम को ऐतिहासिक और बेहद जरूरी बताया है, वहीं दूसरी तरफ जिन दुकानदारों या लोगों के अतिक्रमण टूटे हैं, उनमें थोड़ी नाराजगी भी देखने को मिली है। हालांकि प्रशासन ने पहले ही सभी संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर अपनी दुकानें और कब्जे खुद हटाने की चेतावनी दी थी, जिसके बावजूद कब्जा नहीं हटाने पर यह सख्त कार्रवाई अमल में लाई गई। जिला प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि वे शहर को स्वच्छ, सुंदर और अतिक्रमण मुक्त रखने में प्रशासन का पूरा सहयोग करें, ताकि बूंदी को विकास की राह पर और तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।

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