स्कूलों की बदहाली और मीडिया एंट्री पर रोक: सचिन पायलट का सरकार पर तीखा हमला, पूछा- सच छिपाने की यह कैसी मजबूरी
राजस्थान की राजनीति में सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत और शिक्षा विभाग के नए फरमान को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। राज्य विधानसभा के सत्र के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक सचिन पायलट ने सरकार के उस विवादास्पद निर्देश पर कड़ा ऐतराज़ जताया है, जिसके तहत सरकारी विद्यालयों में अनधिकृत प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। पायलट ने इसे तानाशाही रवैया करार देते हुए तीखा हमला बोला और कहा कि सरकार अपनी नाकामियों और स्कूलों की बदहाल तस्वीर को छिपाने के लिए ऐसे दमनकारी नियम बना रही है, जबकि जरूरत इस बात की थी कि बदहाल बुनियादी ढांचे को दुरुस्त किया जाए।
स्कूलों में मीडिया और फोटोग्राफी पर प्रतिबंध क्यों
हाल ही में राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए एक नए आदेश के अनुसार, अब बिना पूर्व अनुमति के कोई भी बाहरी व्यक्ति, पत्रकार या आम नागरिक सरकारी स्कूलों के परिसरों में प्रवेश नहीं कर सकेगा और न ही वहां की तस्वीरें या वीडियो बना सकेगा। इस निर्देश के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार स्कूलों की खस्ताहाली, टूटी-फूट इमारतों और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को जनता और मीडिया की नजरों से छिपाना चाहती है। सचिन पायलट ने मीडिया से मुखातिब होते हुए सवाल उठाया कि यदि स्कूलों में सब कुछ ठीक है, तो फिर सच दिखाने या कैमरे से रिकॉर्ड करने पर प्रतिबंध लगाने की क्या आवश्यकता है।
विधानसभा के बाहर कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन
शिक्षा विभाग के इस आदेश के विरोध में कांग्रेस पार्टी के विधायकों और नेताओं ने [राजस्थान विधानसभा](cite: 1.1.1) के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, जब नेताओं ने बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की। सचिन पायलट और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विधानसभा परिसर के बाहर धरने पर बैठकर सरकार की नीतियों के खिलाफ हल्ला बोला। उनका साफ कहना था कि चुनी हुई सरकारों को पारदर्शी होना चाहिए, न कि जनता के सवालों से भागने के लिए इस तरह के तुगलकी फरमान जारी करने चाहिए।
राज्य के सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत
सचिन पायलट ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज प्रदेश के अधिकांश सरकारी स्कूलों की इमारतें जर्जर और खतरनाक स्थिति में पहुंच चुकी हैं। कई जगहों पर सुरक्षा के अभाव और लचर व्यवस्था के कारण बच्चों की जान पर बन आई है, लेकिन प्रशासन सुधार कार्य करने के बजाय पाबंदियां लगाने में व्यस्त है। उन्होंने झालावाड़ और अन्य जिलों की पूर्व की दर्दनाक घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए, न कि उन लोगों की आवाज दबाने पर जो इन कमियों को उजागर कर रहे हैं।
विपक्ष की मांग और आगे का राजनीतिक रुख
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस जनविरोधी आदेश को वापस लेने के लिए सरकार पर लगातार दबाव बनाएंगे। विधानसभा सत्र के दौरान भी इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला, जहां विपक्षी सदस्यों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और इस आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा यह ताजा विवाद आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बनने वाला है, जिससे सत्ता पक्ष की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।