राजस्थान पंचायत चुनाव का बिगुल: प्रशासनिक तैयारियां हुई तेज, अब सभी जिला कलेक्टर निकालेंगे आरक्षण की लॉटरी
राजस्थान (Rajasthan) की ग्रामीण राजनीति में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है, क्योंकि राज्य में आगामी पंचायत चुनावों (Panchayat Elections) को लेकर प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनावों के मद्देनजर राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के बाद जिला स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच रही हैं। चुनाव प्रक्रिया की सबसे अहम कड़ी माने जाने वाले आरक्षण की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए अब सभी जिलों में जिला कलेक्टरों (District Collectors) द्वारा आरक्षण की लॉटरी निकालने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही चुनावी सरगर्मी और अधिक परवान चढ़ने की पूरी उम्मीद है।
क्या है आरक्षण की लॉटरी और क्यों होती है यह प्रक्रिया?
पंचायती राज व्यवस्था के नियमों के अनुसार, चुनाव से पहले ग्राम पंचायतों के सरपंच पदों, पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों के लिए सीटों का आरक्षण तय किया जाता है। इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिलाओं के लिए वार्डों व पदों का निर्धारण चक्रानुक्रम (Rotation System) के आधार पर किया जाता है। पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जिला मुख्यालयों पर प्रेक्षकों की मौजूदगी में कलेक्टर द्वारा यह लॉटरी निकाली जाती है, ताकि किसी भी प्रकार के संशय की गुंजाइश न रहे।
राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों की बढ़ी धड़कनें
जैसे-जैसे आरक्षण की लॉटरी की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की सांसें तेज हो गई हैं। कई दिग्गज नेता और पूर्व जनप्रतिनिधि इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि उनकी पारंपरिक सीट इस बार आरक्षित श्रेणी में जाती है या अनारक्षित रहती है। इसके आधार पर ही वे अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार कर रहे हैं। गांवों की चौपालों से लेकर चाय की थड़ियों तक अब सिर्फ इसी बात की चर्चा है कि किस पंचायत या वार्ड में इस बार किसके लिए मुकाबला आसान या कठिन होने वाला है।
प्रशासनिक अमला और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश
जिला प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आरक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह से शांतिपूर्ण और नियमानुसार संपन्न हो। लॉटरी निकलने के तुरंत बाद आपत्तियां आमंत्रित करने और उनका निस्तारण करने का समय दिया जाएगा, जिसके बाद अंतिम मतदाता सूचियों और सीटों का प्रकाशन होगा। इन तमाम प्रशासनिक गतिविधियों के साथ ही राजस्थान में आगामी पंचायत चुनावों के तारीखों के ऐलान का काउंटडाउन भी शुरू हो चुका है, जिससे राज्य का ग्रामीण राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है।