किरोड़ी लाल मीणा का बड़ा खुलासा: ED की कार्रवाई के बाद भी कैसे मिला 20 करोड़ का बजरी खनन ठेका? CM को लिखा पत्र

किरोड़ी लाल मीणा का बड़ा खुलासा: ED की कार्रवाई के बाद भी कैसे मिला 20 करोड़ का बजरी खनन ठेका? CM को लिखा पत्र

राजस्थान की राजनीति और प्रशासन के गलियारों में एक बार फिर बजरी खनन का मुद्दा गरमा गया है। मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने एक गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है, जिसने प्रशासनिक महकमे में खलबली मचा दी है। मंत्री का आरोप है कि जिस कंपनी की संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अटैच की गई है, उसे आखिर 20 करोड़ रुपये का बड़ा बजरी खनन ठेका कैसे आवंटित कर दिया गया? यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है, बल्कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर रहा है।

नियमों की अनदेखी या मिलीभगत का खेल?

मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने अपने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि यदि किसी कंपनी पर मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप हैं और उसकी संपत्ति ED की निगरानी में है, तो सरकारी नियमों के अनुसार उसे किसी भी नए ठेके में भाग लेने या उसे हासिल करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद, खनन विभाग द्वारा इस कंपनी को ठेका दिया जाना किसी बड़ी मिलीभगत या उच्च-स्तरीय लापरवाही का संकेत है। मंत्री ने मांग की है कि इस पूरे आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर किन अधिकारियों की मिलीभगत से यह ठेका आवंटित हुआ।

मुख्यमंत्री के सामने बड़ी चुनौती, जांच की मांग

इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद अब मुख्यमंत्री कार्यालय पर दबाव बढ़ गया है। 20 करोड़ रुपये का यह मामला राजस्थान के खनन सेक्टर में चल रहे बड़े खेल की केवल एक बानगी माना जा रहा है। किरोड़ी लाल मीणा ने अपने पत्र के माध्यम से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से इस ठेके को रद्द किया जाए और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। इस मामले ने विपक्ष को भी एक बड़ा मुद्दा दे दिया है, जिससे सरकार के लिए आने वाले दिनों में मुश्किल खड़ी हो सकती है। लोग अब यह जानने के उत्सुक हैं कि क्या सरकार वास्तव में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी या यह मामला केवल फाइलों में दबकर रह जाएगा।

प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल

खनन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जहां सरकारी राजस्व का बड़ा हिस्सा दांव पर होता है, वहां ED जैसी केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई को नजरअंदाज करना कई संदेह पैदा करता है। जानकारों का कहना है कि टेंडर जारी करने से पहले कंपनी की वित्तीय साख और बैकग्राउंड चेक अनिवार्य होता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अधिकारियों ने जानबूझकर यह जानकारी छुपाई या सिस्टम में इतनी बड़ी खामी है। किरोड़ी लाल मीणा की इस पहल ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी छवि को मजबूत किया है, और अब सभी की निगाहें सीएम की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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