शेखावाटी की बदलेगी किस्मत! 30 साल पुराने यमुना जल समझौते पर आज दिल्ली में मुहर, जानें कब और कैसे पहुंचेगा पानी
राजस्थान के शेखावाटी अंचल और आसपास के प्यासे इलाकों के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। पिछले तीन दशकों यानी 30 साल से फाइलों में दबे पड़े बहुप्रतीक्षित यमुना जल समझौते को लेकर आज देश की राजधानी दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही राजस्थान के चूरू, झुंझुनूं और सीकर जैसे जिलों के करोड़ों लोगों का दशकों पुराना सपना सच होने की राह आसान हो गई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की मौजूदगी में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक और एमओयू के बाद शेखावाटी की सूखी धरती को यमुना के पानी से सींचने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।
तीन दशकों का लंबा इंतजार और कानूनी अड़चनें हुईं दूर
गौरतलब है कि साल 1994 में राज्यों के बीच यमुना नदी के पानी के बंटवारे को लेकर एक शुरुआती समझौता हुआ था, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी, रूट के चयन और राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया था। राजस्थान के हिस्से का पानी हरियाणा से होकर आना था, जिसे लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय तक तकनीकी और कानूनी खींचतान चलती रही। अब केंद्र सरकार की मध्यस्थता और दोनों राज्यों के प्रशासनिक अधिकारियों की लगातार बैठकों के बाद सभी विवादित बिंदुओं को सुलझा लिया गया है, जिसके बाद आज इस अंतिम एमओयू पर अंतिम मुहर लग रही है।
शेखावाटी के इन जिलों को मिलेगा पीने और सिंचाई का भरपूर पानी
इस महत्वाकांक्षी यमुना जल परियोजना के धरातल पर उतरने से सबसे बड़ा फायदा राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र को मिलेगा। चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों में भूमिगत जल स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है और कई इलाके डार्क जोन में तब्दील हो चुके हैं। इस प्रोजेक्ट के जरिए पाइपलाइन और नहरों का एक विशाल नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे न केवल इन जिलों के लाखों घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचेगा, बल्कि कृषि प्रधान इस इलाके के किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी मिल सकेगा। इससे क्षेत्र में खेती-किसानी और समृद्धि के एक नए युग की शुरुआत होगी।
दिल्ली में होने वाली इस बैठक पर पूरे राजस्थान की निगाहें
आज दिल्ली में आयोजित होने जा रहे इस एमओयू कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री और हरियाणा के मुख्यमंत्री समेत दोनों राज्यों के जल संसाधन विभागों के आला अधिकारी शामिल हो रहे हैं। इस समझौते के तुरंत बाद प्रोजेक्ट के बजट आवंटन, सर्वे और निर्माण कार्य की समयसीमा तय की जाएगी। जनप्रतियोगियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह सिर्फ पानी का समझौता नहीं है, बल्कि यह शेखावाटी की लाइफलाइन साबित होने वाला प्रोजेक्ट है। अब देखना यह होगा कि इस एमओयू के बाद धरातल पर काम कितनी तेजी से शुरू होता है।