रेलवे में शर्मनाक कारनामा: बेडरोल चोरी में बीकानेर बना 'नंबर वन', जोधपुर भी टॉप-5 में शामिल
भारतीय रेलवे की यात्री सुविधाओं और सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रेलवे की ताजा आंतरिक रिपोर्ट में राजस्थान के दो प्रमुख रेल मंडलों का नाम 'बेडरोल चोरी' के मामले में सबसे ऊपर आया है, जिसने रेलवे प्रशासन की साख पर बड़ा दाग लगा दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, बीकानेर रेल मंडल बेडरोल (चादर, तकिया, कंबल और तौलिया) चोरी के मामलों में पूरे देश में पहले पायदान पर पहुंच गया है। वहीं, जोधपुर मंडल का नाम भी देश के उन टॉप-5 मंडलों में शामिल है, जहाँ बेडरोल की सबसे ज्यादा चोरी होती है।
बीकानेर और जोधपुर की शर्मनाक स्थिति
रेलवे द्वारा किए गए ऑडिट में सामने आया है कि बीकानेर मंडल से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में बेडरोल गायब होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यात्री न केवल चादर और तौलिये बल्कि तकिये के कवर तक साथ ले जा रहे हैं। बीकानेर मंडल में चोरी के ये आंकड़े इतने अधिक हैं कि इसे रेलवे के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इसके साथ ही जोधपुर रेल मंडल की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां यात्री सुविधाओं के नाम पर मिलने वाले इन सामानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रेलवे के लिए सिरदर्द बन गया है।
क्यों हो रही है इतनी ज्यादा चोरी?
रेलवे के जानकारों का मानना है कि बेडरोल चोरी के पीछे कई कारण हैं। पहला, यात्रियों में इन सामानों को 'स्मृति चिह्न' (Souvenir) के तौर पर साथ ले जाने की बढ़ती प्रवृत्ति। दूसरा, ट्रेनों में अटेंडेंट की भारी कमी, जिसके कारण प्रत्येक कोच की निगरानी करना मुश्किल हो जाता है। कई बार सफाई के दौरान या गंतव्य पर पहुंचने से पहले ही सामान गायब कर दिया जाता है। इस चोरी से रेलवे को हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, चोरी की यह घटना रेलवे स्टाफ की मिलीभगत की ओर भी इशारा करती है, जिससे सख्ती बरतने की आवश्यकता है।
अब रेलवे की सख्ती और नया प्लान
इस शर्मनाक स्थिति से निपटने के लिए अब उत्तर-पश्चिम रेलवे ने कमर कस ली है। जल्द ही चोरी को रोकने के लिए 'डिजिटल इन्वेंट्री मैनेजमेंट' और हर कोच में बेडरोल का सटीक रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था लागू की जाएगी। रेलवे अब उन कोचों की विशेष निगरानी करेगा जहां चोरी की घटनाएं ज्यादा होती हैं। इसके साथ ही, यात्रियों से अपील की जा रही है कि वे अपनी जिम्मेदारी समझें और रेलवे की संपत्ति को नुकसान न पहुंचाएं। यदि चोरी के मामले कम नहीं हुए, तो रेलवे प्रशासन बेडरोल सप्लाई की व्यवस्था में बड़े बदलाव करने पर विचार कर सकता है, जिससे सीधे तौर पर आम यात्रियों की सुविधाओं में कटौती हो सकती है।