जालंधर निगम हाउस बैठक में जबरदस्त हंगामा: मेयर ने महज डेढ़ मिनट में पास कर दिए सभी प्रस्ताव

जालंधर निगम हाउस बैठक में जबरदस्त हंगामा: मेयर ने महज डेढ़ मिनट में पास कर दिए सभी प्रस्ताव

पंजाब के प्रमुख औद्योगिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील शहर जालंधर से नगर निगम की बैठकों को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और हंगामेदार खबर सामने आई है। जालंधर नगर निगम हाउस की बैठक के दौरान ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला जिसने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। बैठक की शुरुआत होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जो कुछ ही पों में बड़े हंगामे में तब्दील हो गई। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि निगम के मेयर ने बिना किसी लंबी बहस या चर्चा के मात्र डेढ़ मिनट के भीतर ही एजेंडे में शामिल सभी विकास और प्रशासनिक प्रस्तावों को पास करने की घोषणा कर दी। मेयर के इस त्वरित और एकतरफा फैसले से भड़के विपक्षी पार्षदों ने अपना आपा खो दिया और सदन के बीचों-बीच आकर जमकर नारेबाजी की। गुस्से से लाल-पीले हुए विपक्ष के पार्षदों ने बैठक की कार्यसूची और प्रस्तावों की कॉपियों को हवा में उछाल दिया, जिससे सदन का माहौल पूरी तरह अखाड़े में तब्दील हो गया। इस हाई-ड्रामा के कारण एक बार फिर स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली और सदन चलाने के तौर-तरीकों पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं, जिसकी चर्चा पूरे पंजाब में हो रही है।

डेढ़ मिनट में प्रस्ताव पास होने पर विपक्ष का फूटा गुस्सा

जालंधर नगर निगम हाउस की बैठकों का इतिहास हमेशा से तीखी बहसों और मुद्दों पर लंबी चर्चाओं वाला रहा है, लेकिन इस बार जो कुछ भी हुआ उसने सबको हैरान कर दिया। पार्षदों का आरोप है कि शहर के विकास कार्यों, सीवर, पानी, सफाई और हाउस टैक्स जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए महीनों बाद बैठक बुलाई जाती है, लेकिन जब अधिकारी और मेयर जनता के सवालों से घिरने लगते हैं, तो वे मनमाने तरीके से औपचारिकता पूरी कर देते हैं। इस बार भी जैसे ही बैठक की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी पार्षदों ने शहर के विभिन्न वार्डों में रुके पड़े विकास कार्यों और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति को भांपते हुए और किसी भी लंबी बहस से बचने के लिए मेयर ने डेढ़ मिनट के अंदर ही सभी प्रस्तावों को पास हुआ घोषित कर दिया। इस एकतरफा फैसले से गुस्साए पार्षदों ने इसे अलोकतांत्रिक करार देते हुए सदन के वेल में आकर विरोध प्रदर्शन किया और कागजों को फाड़कर हवा में उछाल दिया।

कागजात और कॉपियां उछालने से गरमाया स्थानीय राजनीतिक माहौल

सदन के भीतर कॉपियां और एजेंडे के कागजात उछाले जाने की इस घटना ने पंजाब की स्थानीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि जालंधर की जनता ने जिन उम्मीदों के साथ अपने पार्षदों को चुनकर निगम में भेजा था, उनके अधिकारों का इस तरह से हनन किया जा रहा है। पार्षदों का तर्क था कि जनता के गाढ़े पसीने की कमाई और टैक्स के पैसों से शहर में होने वाले करोड़ों रुपये के कार्यों का हिसाब मांगने का हक हर चुने हुए प्रतिनिधि को है, लेकिन सत्ता पक्ष विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए तानाशाही रवैया अपना रहा है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के समर्थकों का यह कहना था कि कुछ विपक्षी पार्षद जानबूझकर सदन की कार्यवाही को बाधित करना चाहते थे और विकास कार्यों में अंगा अड़ाना उनका एकमात्र एजेंडा बन चुका था, जिसके चलते समय की नजाकत को देखते हुए कड़े फैसले लेने पड़े।

शहर के रुके हुए विकास कार्य और जनता के बुनियादी मुद्दे बने हंगामे की वजह

इस पूरे हंगामे की जड़ में जालंधर शहर की बदहाल होती बुनियादी समस्याएं और लंबे समय से अटके पड़े विकास कार्य हैं। शहर के कई इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई, सीवर ओवरफ्लो, टूटी हुई सड़कें और स्ट्रीट लाइटों की खराब व्यवस्था को लेकर आम जनता में पहले से ही भारी आक्रोश व्याप्त है। पार्षद जब इन स्थानीय मुद्दों को लेकर निगम हाउस में जवाब मांगने पहुंचते हैं और उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता, तो सदन के भीतर इस तरह की तनातनी होना स्वाभाविक हो जाता है। जालंधर के नागरिक लंबे समय से यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि राजनीति से ऊपर उठकर शहर के विकास के लिए काम करेंगे, लेकिन इस तरह के हंगामे और राजनीतिक ड्रामे से आम जनता का सिस्टम से भरोसा उठता जा रहा है।

प्रशासनिक व्यवस्था और लोकतंत्र की गरिमा पर उठते गंभीर सवाल

नगर निगम जैसी संस्थाएं स्थानीय स्वशासन की धुरी होती हैं, जहां शहर की जनता की छोटी से छोटी समस्याओं का समाधान लोकतांत्रिक तरीके से संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए। लेकिन जब सदन के भीतर डेढ़ मिनट में करोड़ों रुपये के प्रस्ताव पास होने लगे और जनप्रतिनिधि आपस में कागजात फेंकने लगें, तो यह लोकतंत्र की गरिमा पर एक बड़ा आघात माना जाता है। इस घटना ने प्रशासनिक अधिकारियों और मेयर की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं कि आखिर भविष्य में शहर के विकास की रूपरेखा बिना चर्चा के कैसे तय होगी। जालंधर की जनता अब यह उम्मीद कर रही है कि आने वाले समय में इस तरह के गतिरोध को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे ताकि शहर को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया जा सके।

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