बेअदबी कानून पर स्पीकर कुलतार संधवां का बड़ा बयान, कहा- तख्त साहिब से नहीं, जनता और विशेषज्ञों से मिले हैं सुझाव
पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने बेअदबी (Sacrilege) के मामलों से निपटने के लिए प्रस्तावित कानून पर एक बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। अक्सर यह चर्चा होती रही है कि क्या इस कानून को लेकर अकाल तख्त साहिब से कोई दिशा-निर्देश प्राप्त हुए हैं, लेकिन स्पीकर ने इन कयासों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेअदबी कानून को सख्त बनाने को लेकर उन्हें सीधे तौर पर तख्त साहिब से कोई निर्देश नहीं मिले हैं, बल्कि इस संबंध में उन्हें आम जनता, कानूनी विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों से महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं।
कानून निर्माण में सुझावों की भूमिका
स्पीकर संधवां ने कहा कि लोकतंत्र में कानून बनाना एक सामूहिक प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि उनकी प्राथमिकता यह है कि कानून ऐसा हो जो न केवल जनभावनाओं का सम्मान करे, बल्कि कानूनी रूप से भी पूरी तरह सशक्त हो। बेअदबी जैसे संवेदनशील मामलों में सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी चुनौती से बचा जा सके। स्पीकर के अनुसार, उन्हें समाज के विभिन्न वर्गों से जो सुझाव मिले हैं, वे इस कानून का मसौदा तैयार करने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे इन सभी सुझावों का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं ताकि एक सर्वसम्मत और कड़ा कानून लाया जा सके।
संवेदनशीलता और जवाबदेही पर जोर
इस मुद्दे पर बात करते हुए स्पीकर ने जोर दिया कि बेअदबी की घटनाएं समाज के घाव की तरह होती हैं, जिन्हें भरने के लिए न्यायपूर्ण और कड़ी व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने साफ किया कि सरकार किसी एक के निर्देश पर नहीं, बल्कि संविधान के दायरे में रहकर जनता की मांगों के अनुरूप कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी पक्षों से धैर्य रखने की अपील की और कहा कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई ठोस फैसला सामने आएगा। उनका यह बयान उन लोगों के लिए स्पष्ट संदेश है जो इस मामले में राजनीतिक और धार्मिक हस्तियों की भूमिका पर सवाल उठा रहे थे।