पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस में रार! पद बंटते ही वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी के 'क्रिप्टिक पोस्ट' से मची खलबली
पंजाब विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच कांग्रेस आलाकमान द्वारा पदों की घोषणा करते ही पार्टी के भीतर की अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस द्वारा पंजाब चुनावों के लिए महत्वपूर्ण सांगठनिक पदों और जिम्मेदारियों का बंटवारा किए जाने के तुरंत बाद, पार्टी के बेहद वरिष्ठ नेता और सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी (क्रिप्टिक) पोस्ट शेयर कर दिया है। इस पोस्ट के सामने आते ही पंजाब से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। राजनीतिक पंडित इसे टिकट बंटवारे और संगठन में अनदेखी से उपजे असंतोष के रूप में देख रहे हैं।
पार्टी में पद बंटते ही क्यों तल्ख हुए मनीष तिवारी के सुर?
कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब चुनाव अभियान को गति देने के लिए जैसे ही नई कमेटियों और अहम पदों की सूची जारी की, उसमें कई गुटीय समीकरणों को साधने की कोशिश की गई थी। लेकिन ऐसा लगता है कि यह फॉर्मूला पूरी तरह सटीक नहीं बैठा। मनीष तिवारी, जो कांग्रेस के बड़े कद्दावर नेताओं में शुमार हैं और पार्टी के 'जी-23' (G-23) ग्रुप के भी अहम सदस्य रहे हैं, का यह पोस्ट ठीक उसी समय आया जब नए पदाधिकारियों के नामों का ऐलान हुआ। जानकारों का मानना है कि पार्टी के इस फैसले से वरिष्ठ नेताओं का एक धड़ा खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है।
क्या लिखा है मनीष तिवारी के इस रहस्यमयी सोशल मीडिया पोस्ट में?
मनीष तिवारी ने अपने आधिकारिक हैंडल से जो पोस्ट साझा किया है, उसमें सीधे तौर पर किसी का नाम तो नहीं लिया गया है, लेकिन शब्दों के चयन से साफ है कि उनका निशाना पार्टी के भीतर के ताजा घटनाक्रमों पर ही है। इस तरह के इशारों-इशारों में लिखे गए पोस्ट को राजनीति में बड़े बदलाव या बगावत के संकेत के तौर पर देखा जाता है। सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है और विपक्षी दल भी इसे लपककर कांग्रेस की अंदरूनी फूट पर तंज कसने लगे हैं।
पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी आलाकमान के लिए बनी बड़ी सिरदर्दी
यह कोई पहला मौका नहीं है जब पंजाब कांग्रेस में इस तरह का घमासान देखने को मिला है। चुनावों के ठीक मुहाने पर खड़े राज्य में वरिष्ठ नेताओं की इस तरह की नाराजगी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को तगड़ा झटका दे सकती है। एक तरफ जहां जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ मनीष तिवारी जैसे कद्दावर चेहरे का यह रुख साफ करता है कि पंजाब यूनिट के भीतर ऑल इज नॉट वेल। अब देखना यह होगा कि आलाकमान इस डैमेज को कंट्रोल करने के लिए क्या कदम उठाता है या फिर यह असंतोष किसी नए सियासी तूफान का रूप ले लेगा।