पंजाब में भीषण गर्मी और बीमारियों का कहर: 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' बनी संजीवनी

पंजाब में भीषण गर्मी और बीमारियों का कहर: 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' बनी संजीवनी

पंजाब में इस वक्त गर्मी का सितम इस कदर बढ़ गया है कि इसका असर अब सिर्फ खेतों या खाली सड़कों पर ही नहीं, बल्कि अस्पतालों के वार्डों में भी साफ नजर आ रहा है। झुलसा देने वाली इस गर्मी की वजह से गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट का इन्फेक्शन) और डिहाइड्रेशन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में उल्टी, दस्त और कमजोरी के मरीजों की लाइनें लगी हैं। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में भगवंत मान सरकार की 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत बनकर सामने आई है।

आंकड़े जो हकीकत बयां करते हैं

इस साल जनवरी से लेकर अप्रैल तक के आंकड़े बताते हैं कि कैसे यह योजना आम लोगों के काम आ रही है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 3,279 गंभीर मरीजों का कैशलेस इलाज किया गया है। सिर्फ गैस्ट्रो और पेट की बीमारियों पर ही 73.42 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

  • अकेले अप्रैल महीने में 1,400 से ज्यादा लोगों ने डिहाइड्रेशन और पेट से जुड़ी बीमारियों का इलाज कराया।

  • इनमें 1,050 से ज्यादा मरीज ऐसे थे जिन्हें मॉडरेट डिहाइड्रेशन के साथ तेज गैस्ट्रोएंटेराइटिस था।

  • करीब 115 मरीजों में पानी की बेहद कमी (गंभीर डिहाइड्रेशन) पाई गई।

  • 250 से ज्यादा लोगों को लगातार उल्टी और थकान के कारण अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

बुजुर्गों और बच्चों के लिए सबसे ज्यादा खतरा

फरीदकोट के गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज में बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ. शशि कांत धीर का कहना है कि तेज गर्मी में खाना बहुत जल्दी खराब होता है। दूषित पानी और बाहर का अनहाइजेनिक खाना बीमारियों को न्योता दे रहा है। मरीज अक्सर पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और बुखार की शिकायत लेकर आ रहे हैं। अगर इलाज में देरी हो जाए, तो बीपी कम होने, दिमागी उलझन और किडनी पर असर पड़ने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

खासकर बुजुर्गों में इस मौसम में रिकवरी धीमी होती है, और बच्चों के शरीर में उल्टी-दस्त की वजह से पानी बहुत तेजी से कम होता है, जिससे वे बहुत जल्दी डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं।

होशियारपुर और बाकी जिलों का हाल

इस मौसमी बीमारी का सबसे ज्यादा असर होशियारपुर जिले में देखने को मिला है। यहां 250 से ज्यादा ऐसे बुजुर्ग मरीजों का इलाज हुआ जिन्हें गंभीर डिहाइड्रेशन और पेट का इन्फेक्शन था। जालंधर में भी 100 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं। इसके अलावा पटियाला, लुधियाना, रूपनगर, संगरूर, बरनाला और बठिंडा जैसे जिलों में भी हालात कुछ ऐसे ही बने हुए हैं। मुक्तसर साहिब, पठानकोट और गुरदासपुर में तो कई मरीजों की हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें बिना देरी किए तुरंत अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

इलाज के भारी खर्च से मिली मुक्ति

बीमारी के इस दौर में एक आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता होती है अस्पताल का भारी-भरकम बिल। लेकिन 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' ने इस चिंता को काफी हद तक खत्म कर दिया है। इस योजना के तहत मरीजों की जांच, दवाइयां, आईवी ड्रिप (ग्लूकोज) और अस्पताल में भर्ती होने का पूरा खर्च सरकार उठा रही है। अधिकारियों का मानना है कि सेहत कार्ड होने की वजह से लोग अब पैसों की कमी के डर से घर में बैठकर बीमारी बिगड़ने का इंतजार नहीं करते, बल्कि समय पर अस्पताल पहुंचकर अपना सही इलाज करा रहे हैं।

डॉक्टर की सलाह: बचाव ही सबसे अच्छा इलाज है

डॉ. धीर सलाह देते हैं कि इस भयंकर गर्मी में बच्चों और बुजुर्गों का खास ख्याल रखना बहुत जरूरी है:

  • शरीर में पानी की कमी न होने दें, खूब पानी और अन्य तरल पदार्थ पीते रहें।

  • बाहर जाते समय हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें।

  • दोपहर की चिलचिलाती धूप में बाहर निकलने से बचें।

  • हमेशा घर का बना और ताजा खाना ही खाएं।

अगर परिवार में किसी को भी बुखार, उल्टी या सुस्ती जैसे लक्षण दिखें, तो घरेलू नुस्खों के भरोसे न रहें और तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। आज के समय में, जब गर्मी और बीमारियां दोनों चरम पर हैं, मुख्यमंत्री सेहत योजना सच में पंजाब के लोगों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य गारंटी साबित हो रही है।

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