नाबालिग के कंधे पर चिट्टे की खेप, तीसरी बार में पुलिस के जाल में फंसा तस्कर; लालच में बर्बाद कर रहा था भविष्य
पंजाब के बठिंडा जिले से एक बेहद दर्दनाक और आंखें खोल देने वाली घटना सामने आई है, जिसने समाज के उन चेहरों को बेनकाब कर दिया है जो कम उम्र के बच्चों और नाबालिगों को अपनी गंदी साजिशों के मोहरे बनाते हैं. आज के समय में ड्रग्स माफिया किस हद तक गिर चुके हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे आपराधिक गतिविधियों और खतरनाक नशे की तस्करी के लिए मासूम बच्चों का इस्तेमाल करने लगे हैं. बठिंडा पुलिस की सतर्कता के चलते एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है जहां एक नाबालिग को केवल चंद रुपयों के लालच में चिट्टे (हेरोइन) जैसी खतरनाक और जानलेवा ड्रग्स की खेप एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के काम में झोंक दिया गया था. पुलिस ने गुप्त सूचना और लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए इस नाबालिग को धर दबोचा है, जिसके बाद से इलाके में सनसनी फैल गई है. यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि माता-पिता और समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि कैसे आपराधिक तत्व हमारी युवा पीढ़ी को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं.
महज़ तीन हजार रुपये के लालच में बना ड्रग्स तस्करी का जरिया
पुलिस की शुरुआती पूछताछ और जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं. पकड़ा गया नाबालिग आरोपी अभी अपनी नासमझी की उम्र में ही था कि कुछ शातिर और पेशेवर अपराधियों के संपर्क में आ गया. उन शातिर तस्करों ने उस बच्चे की आर्थिक मजबूरी या नासमझी का फायदा उठाते हुए उसे चंद पैसों का लालच दिया. शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस खतरनाक काम को अंजाम देने के लिए उस नाबालिग को मात्र तीन हजार रुपये देने का वादा किया गया था. इतने कम लालच में आकर उस बच्चे ने अपने सुनहरे भविष्य और जिंदगी को दांव पर लगा दिया. तस्करों को यह अच्छी तरह पता होता है कि पुलिस आमतौर पर नाबालिगों पर तुरंत शक नहीं करती है, और इसी बात का फायदा उठाकर वे बच्चों के कंधों पर बंदूक रखकर अपना काला कारोबार चलाते हैं. लेकिन कानून के लंबे हाथ और सतर्क पुलिस की नजरों से बच पाना आसान नहीं होता है, और आखिरकार यह बच्चा पुलिस के बिछाए गए जाल में फंस ही गया.
लगातार तीसरी बार में पुलिस के शिकंजे में फंसा तस्कर
प्राप्त जानकारियों के अनुसार, यह नाबालिग पहली बार इस अवैध धंधे में शामिल नहीं हुआ था. इससे पहले भी वह दो बार सफलतापूर्वक इस प्रतिबंधित सामग्री की खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा चुका था. शुरुआती सफलताओं ने उसका हौसला बढ़ा दिया था और उसे लगा था कि वह कभी पकड़ा नहीं जाएगा. अपराधियों ने भी उसकी इसी नादानी का फायदा उठाया और उसे लगातार तीसरी बार इस जोखिम भरे काम के लिए मैदान में उतार दिया. लेकिन कहते हैं कि कानून का शिकंजा एक न एक दिन अपराधी तक पहुंच ही जाता है. इस बार बठिंडा पुलिस की एंटी-ड्रग्स विंग पूरी तरह से मुस्तैद थी और उन्हें पहले से ही इस रूट पर संदिग्ध गतिविधियों की भनक लग चुकी थी. जैसे ही नाबालिग अपनी तीसरी कोशिश के दौरान कंधे पर चिट्टे की खेप लेकर तयशुदा ठिकाने की ओर बढ़ रहा था, पुलिस ने उसे दबोच लिया. तलाशी के दौरान उसके पास से भारी मात्रा में नशीला पदार्थ बरामद किया गया, जिससे उसके सारे मंसूबे धरे के धरे रह गए.
पुलिस की बड़ी कार्रवाई, सिंडिकेट के बड़े चेहरों की तलाश जारी
इस सनसनीखेज गिरफ्तारी के बाद बठिंडा पुलिस अब इस पूरे ड्रग्स रैकेट के मुख्य सरगनाओं और मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए अपनी जांच का दायरा तेजी से बढ़ा रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ एक नाबालिग को पकड़कर मामला खत्म नहीं हो जाता, बल्कि इसके पीछे जो लोग बच्चों को इस दलदल में धकेल रहे हैं, उन्हें सलाखों के पीछे भेजना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. पुलिस पकड़े गए नाबालिग से लगातार पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने किन-किन लोगों के कहने पर यह काम किया था और इस सप्लाई चेन में और कौन-कौन से बड़े नाम शामिल हैं. इस मामले ने एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिया है कि पंजाब में नशे के सौदागरों के हौसला कितने बुलंद हैं, जिन्हें कुचलने के लिए समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर कड़े कदम उठाने होंगे