सांसद संदीप पाठक को बड़ी राहत: चौथी बार भी नाकाम रही पंजाब सरकार, नहीं दे पाई FIR का ब्योरा

सांसद संदीप पाठक को बड़ी राहत: चौथी बार भी नाकाम रही पंजाब सरकार, नहीं दे पाई FIR का ब्योरा

आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद डॉ. संदीप पाठक के लिए अदालती मोर्चे से एक बड़ी और सुकून भरी खबर सामने आई है। हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार को फिर से कड़ी फटकार लगाई है। मामला सांसद के खिलाफ दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें पंजाब सरकार लगातार चौथी बार कोर्ट के सामने कोई भी ठोस ब्योरा पेश करने में विफल रही है। कोर्ट ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए अब मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अक्टूबर की तारीख तय की है।

कोर्ट की नाराजगी और पंजाब सरकार की विफलता

सुनवाई के दौरान जब हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से सांसद संदीप पाठक के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे संबंधित दस्तावेजों का ब्योरा मांगा, तो राज्य के वकील एक बार फिर खाली हाथ नजर आए। कोर्ट ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर की और टिप्पणी की कि किसी भी नागरिक के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद उसका ब्योरा देने में इतनी देरी क्यों की जा रही है? सरकार की ओर से लगातार चौथी बार समय मांगे जाने पर कोर्ट ने इसे प्रक्रियात्मक लापरवाही मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है। सांसद के कानूनी दल ने इसे राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित कार्रवाई बताते हुए तत्काल राहत की मांग की थी।

क्या है पूरा मामला और सांसद की दलील?

डॉ. संदीप पाठक के खिलाफ यह कानूनी विवाद पिछले कुछ समय से सुर्खियां बटोर रहा है। सांसद का आरोप है कि पंजाब सरकार की मशीनरी का इस्तेमाल उनके खिलाफ बिना किसी ठोस आधार के किया जा रहा है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होता है, तो राज्य एजेंसी को उसका ब्योरा कोर्ट में रखने का संवैधानिक अधिकार और कर्तव्य होता है। बार-बार ब्योरा पेश न कर पाना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या प्रशासन के पास मामले को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं भी या नहीं?

17 अक्टूबर को क्या हो सकता है फैसला?

अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को होनी है, जिसे इस मामले के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। यदि पंजाब सरकार उस दिन भी मामले का स्पष्ट ब्योरा देने में नाकाम रहती है, तो कोर्ट मामले को रद्द करने या सांसद को बड़ी राहत देने का निर्णय ले सकता है। कानून के जानकारों का मानना है कि इस तरह की देरी अंततः आरोपी के पक्ष में जाती है, क्योंकि यह एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करती है। फिलहाल, डॉ. संदीप पाठक को मिली यह अंतरिम राहत बरकरार रहेगी और 17 अक्टूबर की तारीख इस कानूनी लड़ाई का रुख तय करेगी।

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