क्या बनी रहेगी धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी? जन्मदिन पर पीएम मोदी के खास संदेश ने दिए बड़े संकेत

क्या बनी रहेगी धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी? जन्मदिन पर पीएम मोदी के खास संदेश ने दिए बड़े संकेत

नीट पेपर लीक मामले और सीबीएसई परीक्षाओं को लेकर मचे घमासान के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इन दिनों विपक्ष के निशाने पर हैं। उनके इस्तीफे की मांग तेज है और सियासी गलियारों में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें जोरों पर हैं। इसी बीच, शिक्षा मंत्री के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई बधाई ने एक नई बहस छेड़ दी है। पीएम मोदी ने न केवल उन्हें शुभकामनाएं दीं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के कार्यान्वयन में उनके प्रयासों की खुलकर सराहना की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विवादों के बीच पीएम का यह सार्वजनिक संदेश प्रधान की कुर्सी के लिए एक 'संजीवनी' की तरह है, जिसने उनके पद से हटाए जाने की चर्चाओं को फिलहाल ठंडा कर दिया है।

नीट विवाद और कैबिनेट बदलाव का गणित प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही अपनी आगामी विदेश यात्रा से लौटने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल का ऐलान कर सकते हैं। चर्चाएं गर्म हैं कि इस बदलाव में कई बड़े चेहरों के विभाग बदले जा सकते हैं। धर्मेंद्र प्रधान के सामने नीट पेपर लीक के बाद युवाओं का आक्रोश और विपक्ष का चौतरफा हमला है। हालांकि, सरकार के सामने एक बड़ी दुविधा है। अगर वे प्रधान को पद से हटाते हैं, तो यह विपक्ष के दबाव के आगे झुकने जैसा संदेश जाएगा। वहीं, अगर वे उन्हें बरकरार रखते हैं, तो युवाओं के बीच सरकार की छवि को लेकर सवाल उठ सकते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार 'बीच का रास्ता' अपनाते हुए प्रधान का विभाग बदल सकती है या उन्हें संगठन में किसी बड़ी जिम्मेदारी के साथ शिफ्ट कर सकती है।

संकट के समय मंत्रियों के 'ढाल' बनते हैं मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली का एक अहम हिस्सा यह है कि वे सार्वजनिक आलोचनाओं के बीच अपने मंत्रियों का साथ नहीं छोड़ते। इससे पहले भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला हो या केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पीएम ने विवादों के बावजूद सार्वजनिक मंचों पर उनका मनोबल बढ़ाया है। ओम बिरला के मामले में अविश्वास प्रस्ताव के बाद भी उन्हें अहम राजनयिक जिम्मेदारी देना और हरदीप सिंह पुरी की तारीफ करना यह दर्शाता है कि पीएम दबाव में फैसले लेने के बजाय अपनी टीम के साथ मजबूती से खड़े रहते हैं। फिलहाल, धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी प्रधानमंत्री का यह स्टैंड स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार किसी भी हड़बड़ी में निर्णय लेने के बजाय पूरी तरह सोच-समझकर ही अगला कदम उठाएगी।

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