'अदालतें आखिर क्या और कितना कर सकती हैं?', पेपर लीक की PIL पर सुनवाई से SC का किनारा; दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी फैसला
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों और छात्रों के संघर्ष को लेकर न्यायिक मोर्चे पर अहम गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक पर रोक लगाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए दायर की गई एक नई जनहित याचिका (PIL) पर फिलहाल विचार करने से अनचाही जताई है। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि आखिर अदालतें इस तरह के मामलों में क्या और कितना कर सकती हैं?
सुप्रीम कोर्ट में क्या कुछ हुआ?
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने अदालत का ध्यान आकर्षित करते हुए दलील दी कि नीट (NEET) और अन्य प्रमुख परीक्षाओं के पेपर लीक होने की वजह से देश के ढाई करोड़ से ज्यादा छात्रों को गंभीर मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इस पर पीठ ने सवाल उठाया कि इस व्यापक दायरे वाले विषय पर अदालत की सीमाएं क्या हैं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि वह नीट-UG पेपर लीक मामले की सुनवाई पहले से ही कर रही है, इसलिए इस नई जनहित याचिका को अगले महीने तक के लिए स्थगित किया जा रहा है।
याचिका में उठाए गए हैं छात्रों के अधिकार और नुकसान के मुद्दे
वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर इस जनहित याचिका में कहा गया है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक ने युवाओं को गहरी निराशा में धकेल दिया है। परीक्षा रद्द होने से छात्रों को न केवल अपने करियर को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है, बल्कि उनका पूरा साल और आर्थिक पूंजी भी डूब जाती है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि जब राज्य सरकारें समय पर परीक्षा कराने का भरोसा देती हैं और उसमें सेंध लगती है, तो यह सीधे तौर पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत छात्रों के 'समानता के अधिकार' का सीधा उल्लंघन है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर तत्काल सुनवाई से किया इनकार
दूसरी ओर, दिल्ली उच्च न्यायालय ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस द्वारा कथित तौर पर 'अत्यधिक बल प्रयोग' किए जाने के मामले में तत्काल सुनवाई करने से मना कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने याचिकाकर्ता को दो टूक शब्दों में सलाह दी कि अदालत को ऐसे प्रशासनिक मामलों में न घसीटा जाए।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि संसद मार्च के दौरान पुलिस ने बेरहमी से बल प्रयोग किया, जिससे कई छात्र घायल हुए और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो के साथ धक्का-मुक्की की गई। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने दुर्व्यवहार के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पूरी रिपोर्ट को भ्रामक करार दिया है। अदालत ने इस मामले को नियमित प्रक्रिया के तहत बुधवार को सूचीब़्ध करने का निर्देश दिया है।