'हम कुछ और ही मिट्टी के बने हैं...' पोखरण के शौर्य को याद कर बोले PM मोदी— दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती
Up kiran,Digital Desk : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के गौरवशाली इतिहास के पन्नों को पलटते हुए दुनिया को भारत की अदम्य इच्छाशक्ति का परिचय कराया। सोमनाथ अमृत महोत्सव के मंच से राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने 11 मई 1998 के उस ऐतिहासिक पोखरण परमाणु परीक्षण को याद किया, जिसने वैश्विक राजनीति की दिशा बदल दी थी। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को दबाने की कोशिशें पहले भी हुई थीं, लेकिन यह नया भारत न किसी के आगे झुकता है और न ही किसी दबाव में आता है।
दुनिया की 'लाल आंखों' के बाद भी अटल रहा भारत
11 मई की उस तारीख को याद करते हुए पीएम मोदी भावुक और गौरवान्वित नजर आए। उन्होंने बताया कि जब भारत ने परमाणु परीक्षण कर अपनी सामर्थ्य का प्रदर्शन किया, तो पूरी दुनिया में जैसे तूफान आ गया था। शक्तिशाली देशों ने भारत को घेरने की कोशिश की, प्रतिबंध लगाए और विकास के रास्ते रोकने का प्रयास किया। पीएम ने कहा, "दुनिया की आंखें लाल हो गई थीं, हर तरफ से भारत को दबोचने की कोशिश हुई। कोई भी सामान्य देश होता तो शायद हिल जाता, लेकिन हम कुछ और ही मिट्टी के बने हैं।"
अटल जी की इच्छाशक्ति और 13 मई का वो मास्टरस्ट्रोक
प्रधानमंत्री ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के साहस को नमन करते हुए कहा कि 11 मई को वैज्ञानिकों ने अपना काम पूरा कर लिया था, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी थी। वैश्विक दबाव के बावजूद 13 मई को दो और परीक्षण किए गए। यह इस बात का प्रमाण था कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अटल है। पीएम के अनुसार, उस समय भाजपा सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि हमारे लिए 'राष्ट्र प्रथम' है और वैश्विक पाबंदियां हमें अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने से नहीं रोक सकतीं।
सोमनाथ से पोखरण तक: पुनरुत्थान की गौरवगाथा
सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पीएम मोदी ने इसे भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष बताया। उन्होंने कहा कि 1947 में मिली राजनीतिक आजादी को 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने सांस्कृतिक मजबूती दी। सरदार पटेल के प्रयासों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह सोमनाथ ने आक्रमणों के बाद फिर से खड़े होकर अपने गौरव को हासिल किया, ठीक उसी तरह पोखरण ने आधुनिक भारत की शक्ति को दुनिया के सामने स्थापित किया।
दबाव की राजनीति अब भारत पर बेअसर
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपनी क्षमताओं और वैज्ञानिकों के सामर्थ्य पर भरोसा करता है। 1998 का पोखरण परीक्षण केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं थी, बल्कि यह दुनिया को दिया गया एक संदेश था कि भारत को न तो कोई झुका सकता है और न ही कोई शक्ति हमें दबाव में ला सकती है।