'यह सिर्फ एक राजनीतिक ड्रामा है...': कावेरी विवाद से ध्यान भटकाने के लिए बुलाई गई बैठक, थलपति विजय पर DMK का तीखा हमला

'यह सिर्फ एक राजनीतिक ड्रामा है...': कावेरी विवाद से ध्यान भटकाने के लिए बुलाई गई बैठक, थलपति विजय पर DMK का तीखा हमला

तमिलनाडु की राजनीति में लोकसभा सीटों के परिसीमन (Delimitation) और जल विवादों को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। राज्य के मुख्यमंत्री थलपति विजय द्वारा परिसीमन बिल के मुद्दे पर तमिलनाडु के सभी दलों के सांसदों की एक विशेष बैठक बुलाए जाने के बाद मुख्य विपक्षी दल डीएमके (DMK) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। डीएमके के संगठन सचिव आरएस भारती ने सीएम विजय के इस कदम पर करारा तंज कसते हुए इसे पूरी तरह से "ड्रामा" करार दिया है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री यह सारी कवायद केवल और केवल कावेरी जल विवाद जैसे गंभीर और जनहित के मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए कर रहे हैं, जबकि दक्षिणी राज्यों के हितों को लेकर असली चिंताएं पीछे छूट रही हैं।

DMK का तंज: "बिना बच्चा पैदा हुए नाम रखने जैसा है यह प्रयास"

चेन्नई स्थित डीएमके मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वरिष्ठ नेता आरएस भारती ने मुख्यमंत्री विजय की बुलाई गई बैठक पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब तक संसद में आधिकारिक तौर पर परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) पेश ही नहीं किया गया है, तब तक इस तरह की बैठकें बुलाना राजनीति के अलावा कुछ नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "क्या बच्चे के पैदा होने से पहले उसका नाम तय कर दिया जाता है? आप बिना यह जाने कैसे फैसला कर सकते हैं कि आने वाला विधेयक कैसा होगा?" डीएमके का कहना है कि पार्टी ने परिसीमन को लेकर अपने सुझाव और आपत्तियां पहले ही दर्ज करा दी हैं, और आधिकारिक मसौदा सामने आने के बाद ही पार्टी इस पर कोई अंतिम निर्णय लेगी कि इसका समर्थन करना है या विरोध।

मेकेदतु बांध और कावेरी जल विवाद पर क्यों चुप हैं सरकार

आरएस भारती ने सरकार को घेरते हुए कहा कि इस समय तमिलनाडु के लिए सबसे बड़ा और तत्काल चर्चा का विषय 'मेकेदतु बांध परियोजना' और कावेरी जल विवाद होना चाहिए, क्योंकि राज्य के लोग पीने के पानी के लिए परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में इस अहम मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी, जिसे मुख्यमंत्री ने सिरे से ठुकरा दिया। पानी के गंभीर संकट से जनता का ध्यान हटाने के लिए ही अब अचानक परिसीमन के नाम पर सांसदों की यह बैठक बुलाई जा रही है, ताकि राजनीतिक रोटियां सेकी जा सकें।

क्या है परिसीमन विधेयक 2026 और क्यों मचा है सियासी घमासान?

गौरतलब है कि हाल के दिनों में संसद में चर्चा का केंद्र रहे 'परिसीमन विधेयक 2026' को लेकर दक्षिणी राज्यों में लगातार चिंताएं जताई जा रही हैं। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 816 से 850 तक किए जाने की चर्चा है। हालांकि केंद्र सरकार यह दावा कर रही है कि इस प्रक्रिया से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा और तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर लगभग 59 हो सकती हैं, जिससे सदन में उसका अनुपात सुरक्षित रहे। इसके बावजूद, डीएमके इस बात पर पूरी तरह से अडिग है कि दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक ताकत और अधिकारों पर किसी भी प्रकार की आंच नहीं आनी चाहिए, और विधेयक का अंतिम मसौदा आने के बाद ही पार्टी अपनी आगे की रणनीति तय करेगी।

Latest Posts