ओडिशा मेडिकल PG परीक्षा का पेपर WhatsApp पर वायरल: नीट विवाद के बीच एक और बड़ा सिक्योरिटी फेलियर

ओडिशा मेडिकल PG परीक्षा का पेपर WhatsApp पर वायरल: नीट विवाद के बीच एक और बड़ा सिक्योरिटी फेलियर

देश में नीट (NEET) विवाद और पेपर लीक का मुद्दा अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब ओडिशा से एक और हैरान करने वाली खबर सामने आ गई है। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून पास किए जाने के बावजूद, ओडिशा मेडिकल पीजी (Odisha Medical PG) परीक्षा का क्वेश्चन पेपर व्हाट्सएप (WhatsApp) पर वायरल होने से हड़कंप मच गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर मोबाइल बैन और कड़ी सुरक्षा के बावजूद परीक्षा हॉल से पेपर बाहर कैसे आ गया? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की ग्राउंड रिपोर्ट और असली सच्चाई।

परीक्षा हॉल से कैसे WhatsApp पर पहुंचा पेपर?

यह पूरा विवाद 27 जुलाई को आयोजित हुई ऑल ओडिशा मेडिकल पीजी परीक्षा (MS/MD 2023-26 बैच) से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनरल सर्जरी थ्योरी का पेपर शुरू होने के चंद मिनटों बाद (करीब 9:58 बजे) ही इसके पन्नों की तस्वीरें कुछ छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप में सर्कुलेट होने लगीं। इस चौंकाने वाले मामले का खुलासा तब हुआ जब भुवनेश्वर के एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के छात्र ने अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। दावा किया जा रहा है कि यह पेपर बेरहामपुर के एमकेसीजी (MKCG) मेडिकल कॉलेज के एक छात्र द्वारा बनाए गए ग्रुप में सबसे पहले शेयर किया गया था। कुछ छात्रों का तो यहां तक कहना है कि परीक्षा के दौरान कुछ अज्ञात नंबरों से आंसर (Answers) भी व्हाट्सएप पर भेजे जा रहे थे।

अधिकारी बोले- यह 'लीक' नहीं, बल्कि...

जैसे ही पेपर वायरल होने की खबर फैली, ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (OUHS) के प्रशासन में खलबली मच गई। हालांकि, एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज के डीन हरेकृष्ण दलाई ने इसे 'पेपर लीक' मानने से साफ इनकार कर दिया है। उनका तर्क है कि अगर परीक्षा से पहले पेपर बाहर आता, तो उसे लीक कहा जाता। लेकिन यह मामला पेपर बंटने के बाद उसे परीक्षा हॉल से चोरी-छिपे बाहर भेजने (Smuggling out) का है। अधिकारियों को इस बात की सबसे ज्यादा हैरानी है कि मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर सख्त बैन के बावजूद, अंदर बैठकर किसी ने पेपर की फोटो कैसे खींची और उसे व्हाट्सएप पर भेज दिया।

आगे की जांच और एक्शन

इस बड़ी सुरक्षा चूक के बाद OUHS के वाइस-चांसलर मानस रंजन साहू ने तुरंत सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपलों के साथ एक वर्चुअल मीटिंग की। फिलहाल एक आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि परीक्षा हॉल में कौन सा डिवाइस इस्तेमाल किया गया था और वह चेकिंग के बावजूद अंदर कैसे पहुंचा। इसके साथ ही, अगस्त में होने वाली बाकी परीक्षाओं (1 और 5 अगस्त) के लिए सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से फुलप्रूफ करने के कड़े निर्देश दे दिए गए हैं।

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