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NEET Paper Leak Controversy: 'छात्र जरूरी या असफल मंत्री?' अमृतसर में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने पीएम मोदी से पूछा सवाल, 20 जून को दिल्ली कूच का एलान

शिक्षा मंत्रालय और परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर देश के युवाओं और छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी कैंपेन के तहत शनिवार को पंजाब के अमृतसर में एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। अमृतसर के प्रसिद्ध 'गोल्डन गेट' (शहर के मुख्य प्रवेश द्वार) पर बड़ी संख्या में छात्रों, युवाओं और प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जुटी। इससे पहले दिल्ली, पुणे और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में भी इस मुद्दे को लेकर तीखे विरोध प्रदर्शन देखने को मिल चुके हैं।

'20 जून को दिल्ली में डालेंगे डेरा, जेल जाने से न डरें छात्र'

अमृतसर में जुटी भारी भीड़ और जनसभा को संबोधित करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार को सीधे शब्दों में अल्टीमेटम दिया। उन्होंने एलान किया कि आगामी 20 जून 2026 को देश भर के छात्र और युवा दिल्ली का रुख करेंगे। उन्होंने कहा, "हम सब 20 जून को दिल्ली जाएंगे और तब तक वहीं पर अपना डेरा डाले रहेंगे, जब तक कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते।"

अभिजीत दीपके ने प्रदर्शनकारी छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वे कानूनी कार्रवाई या जेल जाने से बिल्कुल न डरें। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि जब वे खुद अमेरिका (USA) से भारत लौटे थे, तो उन्हें भी लगा था कि सरकार उन्हें सलाखों के पीछे डाल देगी। लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य नीट (NEET) और सीबीएसई (CBSE) परीक्षाओं के पीड़ितों को न्याय दिलाना और लगातार हो रहे पेपर लीक (Paper Leak) के मामलों में सरकार की जवाबदेही तय करना है।

'पंजाब के बिना कोई आंदोलन सफल नहीं, सवाल पूछने वालों को कहा जाता है पाकिस्तानी'

सीजेपी (CJP) संस्थापक ने देश के लोकतांत्रिक आंदोलनों में पंजाब की भूमिका को सर्वोपरि बताया। उन्होंने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हुए ऐतिहासिक किसान आंदोलन को याद करते हुए कहा, "पंजाब के समर्थन के बिना भारत में कोई भी बड़ा जन आंदोलन कभी सफल नहीं हो सकता। किसानों का वह आंदोलन भी पंजाब की धरती से ही शुरू हुआ था। मैं खुद प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े होने के लिए सिंघु बॉर्डर गया था।"

उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में जो कोई भी सरकार की नीतियों या कमियों पर सवाल उठाता है, उसे तुरंत 'पाकिस्तानी' या देशद्रोही करार दे दिया जाता है। दीपके ने कहा कि परीक्षाओं में हुई कथित गंभीर गड़बड़ियों की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री को तुरंत पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "प्रधानमंत्री को अब एक स्पष्ट विकल्प चुनना होगा—या तो वे देश के करोड़ों छात्रों और उनके भविष्य के साथ खड़े हैं, या फिर एक अयोग्य और असफल मंत्री के साथ। उन्हें यह फैसला जल्द से जल्द करना होगा।"

सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप; प्रदर्शन में उठे क्षेत्रीय मुद्दे

अभिजीत दीपके ने वर्तमान सरकार को युवाओं के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन और उदासीन बताया। उन्होंने कहा कि लंबा अल्टीमेटम दिए जाने के बावजूद शिक्षा मंत्री अपने पद पर बने हुए हैं। सरकार युवाओं की ताकत और उनकी आवाज को बेहद हल्के में ले रही है, यही वजह है कि वे पिछले शनिवार को अमेरिका से केवल छात्रों की आवाज को बुलंद करने के लिए भारत वापस लौटे हैं। प्रदर्शन में शामिल छात्र नेता गुरविंदर सिंह ने भी दावा किया कि युवाओं की इन मांगों को समाज के हर वर्ग का पूरा समर्थन मिल रहा है।

सिख युवाओं ने उठाए स्थानीय मुद्दे: अमृतसर में हुए इस प्रदर्शन के दौरान कई स्थानीय सिख युवाओं और किसान संगठनों ने पंजाब की कुछ अन्य गंभीर समस्याओं को भी मंच के सामने रखा। इनमें मुख्य रूप से बेअदबी (Sacrilege) की पुरानी घटनाएं, सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों जिन्हें 'बंदी सिंह' कहा जाता है की रिहाई का मामला, और कृषि संकट से जूझ रहे किसानों की दुर्दशा के मुद्दे शामिल थे। हालांकि, इस दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने प्रदर्शनकारियों की रणनीति को थोड़ा दिशाहीन भी बताया, क्योंकि सरकार के न झुकने या बात न मानने की स्थिति में आगे के ठोस रोडमैप को लेकर प्रदर्शनकारियों में स्पष्टता की कमी नजर आई।

क्या है 'कॉकरोच जनता पार्टी' और कैसे हुई इसकी शुरुआत?

आपको बता दें कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की शुरुआत पिछले महीने एक अनूठे और व्यंग्यात्मक (Sarcastic) ऑनलाइन मूवमेंट के रूप में हुई थी। यह आंदोलन भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक कथित टिप्पणी के जवाब में शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना "कॉकरोच" से कर दी थी। इस टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर भारी विवाद और आक्रोश पैदा हो गया था। हालांकि, बाद में विवाद बढ़ता देख सीजेआई ने इस पर अपनी सफाई जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि मीडिया के एक हिस्से ने उनके द्वारा कोर्ट रूम में दिए गए बयान को पूरी तरह गलत और तोड़-मरोड़ कर पेश किया था।

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