PM मोदी की 'ईंधन बचाओ' अपील के बीच मिलिंद देवड़ा का मास्टरस्ट्रोक: एक झटके में बचेंगे 100 करोड़, जानें कैसे?
Up kiran, Digital Desk : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने और 'वर्क फ्रॉम होम' जैसे विकल्पों पर विचार करने की अपील की है। पीएम की इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए एनडीए के सहयोगी दल शिवसेना के राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा ने सरकार को एक ऐसा फॉर्मूला दिया है, जिससे न केवल करोड़ों रुपये की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण को भी बड़ा फायदा पहुंचेगा।
देवड़ा का सुझाव है कि यदि संसदीय समितियों (Parliamentary Committees) की बैठकें फिजिकल के बजाय ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की जाएं, तो सरकारी खजाने के सालाना 100 करोड़ रुपये बचाए जा सकते हैं।
ऑनलाइन मीटिंग से बचेगा पैसा और पर्यावरण: देवड़ा का 'डिजिटल' सुझाव
सांसद मिलिंद देवड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जब संसद का सत्र नहीं चल रहा होता है, तब सांसदों को बैठकों के लिए विशेष रूप से दिल्ली बुलाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि संसदीय समितियों और पीएसयू (PSU) रिव्यू मीटिंग्स को वर्चुअली आयोजित किया जा सकता है।
उनके अनुसार, इस कदम से दोहरे फायदे होंगे:
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आर्थिक बचत: सांसदों के हवाई सफर, ठहरने और अन्य प्रोटोकॉल पर होने वाला भारी-भरकम खर्च बचेगा।
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कार्बन फुटप्रिंट: यात्रा कम होने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जो पर्यावरण के अनुकूल होगा।
संसदीय समितियों का गणित: क्यों होता है इतना खर्च?
भारत में वर्तमान में 24 विभागों से जुड़ी संसदीय समितियां हैं। नियमों के मुताबिक, प्रत्येक समिति में कुल 31 सदस्य होते हैं, जिनमें 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा के सांसद शामिल होते हैं। ये समितियां मंत्रालयों के कामकाज, बजट आवंटन और महत्वपूर्ण विधेयकों की समीक्षा करती हैं।
चूंकि ये सांसद देश के अलग-अलग कोनों से दिल्ली आते हैं, इसलिए साल भर में होने वाली दर्जनों बैठकों पर सरकार को करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। मिलिंद देवड़ा का मानना है कि 'डिजिटल इंडिया' के दौर में इन बैठकों को ऑनलाइन शिफ्ट करना सबसे तार्किक कदम है।
ईरान-इजरायल तनाव और भारत की चिंता: क्यों जरूरी है बचत?
पीएम मोदी ने हैदराबाद में अपनी अपील के दौरान पश्चिम एशिया संकट (विशेषकर ईरान से जुड़े तनाव) और 'होर्मुज स्ट्रेट' के बंद होने की संभावनाओं की ओर इशारा किया था। भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। हालांकि भारत का 'स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' काफी मजबूत है, लेकिन एहतियात के तौर पर सरकार अब ईंधन की खपत घटाने पर जोर दे रही है।
पड़ोसी देश पाकिस्तान और श्रीलंका पहले ही गहरे ऊर्जा संकट और ईंधन की कमी के कारण कड़ी पाबंदियां झेल रहे हैं। भारत वैसी स्थिति से बचने के लिए अभी से 'संयम और समझदारी' की नीति पर चल रहा है।
क्या वर्क फ्रॉम होम की होगी वापसी?
पीएम मोदी ने रविवार को अपने संबोधन में स्पष्ट किया था कि हमें फिर से वर्क फ्रॉम होम और विदेश यात्राओं में कटौती जैसे विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए। मिलिंद देवड़ा का सुझाव इसी कड़ी को आगे बढ़ाता है। अब देखना यह होगा कि क्या संसद सचिवालय और सरकार इस '100 करोड़ वाले सुझाव' को अमल में लाते हैं या नहीं।