महाराष्ट्र में टैक्सी-ऑटो और कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा हुई अनिवार्य! नहीं सीखी तो रद्द होगा लाइसेंस

महाराष्ट्र में टैक्सी-ऑटो और कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा हुई अनिवार्य! नहीं सीखी तो रद्द होगा लाइसेंस

महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो, टैक्सी और ओला-उबर कैब चालकों के लिए कामकाजी मराठी का ज्ञान अनिवार्य कर दिया है। 15 अगस्त की समयसीमा खत्म होने के बाद नियम न मानने पर 3 महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंड और परमिट रद्द करने का कड़ा प्रावधान किया गया है। जानिए इस फैसले पर मुंबई के ड्राइवरों की क्या है राय, रोजी-रोटी की चिंताएं और ग्राउंड रिपोर्ट की पूरी हकीकत।

महाराष्ट्र में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और लाखों चालकों की आजीविका से जुड़ा एक बड़ा और नीतिगत फैसला पूरी तरह से लागू होने की दहलीज पर पहुंच चुका है। राज्य सरकार ने मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, काली-पीली टैक्सी और ऐप-आधारित कैब (Ola, Uber, Rapido) चलाने वाले सभी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की कामकाजी जानकारी होना अनिवार्य कर दिया है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट कर दिया है कि गैर-मराठी भाषी चालकों को मराठी सीखने के लिए दी गई 15 अगस्त की अंतिम समयसीमा (Deadline) को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इस फैसले के बाद मुंबई की सड़कों पर रोजाना लाखों मुसाफिरों को अपनी मंजिल तक पहुंचाने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों के बीच असमंजस, डर और मिली-जुली प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।

महाराष्ट्र मोटर वाहन नियमों में बड़ा बदलाव: क्या है सरकार का नया फरमान?

महाराष्ट्र सरकार ने इस व्यवस्था को कानूनी रूप देने के लिए 'महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989' (Maharashtra Motor Vehicles Rules, 1989) में आवश्यक संशोधनों का मसौदा तैयार किया है। विधि एवं न्याय विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद गृह और परिवहन विभाग द्वारा इसके नियम तय किए गए हैं। नए प्रावधानों के तहत राज्य में कमर्शियल पैसेंजर वाहन चलाने वाले हर चालक को बुनियादी स्तर पर मराठी बोलना, पढ़ना और समझना आना चाहिए।

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि किसी चालक के पास मराठी का जरूरी कामकाजी ज्ञान नहीं पाया जाता है, तो परिवहन विभाग की लाइसेंसिंग अथॉरिटी उसे पहले एक लिखित नोटिस जारी करेगी। नोटिस मिलने के बाद चालक को भाषा सीखने और दक्षता साबित करने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा। यदि तय अवधि में चालक मराठी की बुनियादी जानकारी हासिल करने में विफल रहता है, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस के ऑथराइजेशन को अधिकतम 3 महीने के लिए सस्पेंड (निलंबित) किया जा सकता है। इसके बाद भी नियम का पालन न करने पर लाइसेंस और परमिट स्थायी रूप से रद्द करने की सख्त कार्रवाई की जाएगी। यही नहीं, पुराने परमिट के नवीनीकरण (Renewal) और नए कमर्शियल बैज के आवेदन के समय भी मराठी का टेस्ट पास करना अनिवार्य होगा।

ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप-बेस्ड कैब चालकों पर भी लागू होंगे नियम

अब तक भाषाई नियमों की बात मुख्य रूप से पारंपरिक ऑटो-रिक्शा और काली-पीली टैक्सी तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन इस बार राज्य सरकार ने नियमों का दायरा व्यापक करते हुए डिजिटल एग्रीगेटर्स यानी ओला, उबर और रैपिडो के चालकों को भी इसके दायरे में ला दिया है। परिवहन विभाग का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा, सुगम संवाद और स्थानीय भाषा के सम्मान के लिए यह आवश्यक है कि मोबाइल ऐप से कैब चलाने वाले चालक भी यात्रियों से स्थानीय भाषा में संवाद करने में सक्षम हों।

मुंबई की सड़कों से ग्राउंड रिपोर्ट: क्या सोचते हैं टैक्सी और ऑटो चालक?

मुंबई की जीवनरेखा माने जाने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों के बीच सरकार के इस आदेश को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। बांद्रा, अंधेरी, कुर्ला, दादर, ठाणे और मुलुंड के ऑटो-टैक्सी स्टैंड्स पर ड्राइवरों के बीच इस फैसले को लेकर गहन चर्चा छिड़ी हुई है।

मुंबई में दशकों से टैक्सी चला रहे चालकों का एक बड़ा वर्ग इस बात को स्वीकार करता है कि किसी भी राज्य में काम करते हुए वहां की स्थानीय भाषा और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए। कई ड्राइवरों का कहना है कि वे सालों से मुंबई में रह रहे हैं, इसलिए वे ग्राहकों की मराठी आसानी से समझ लेते हैं और किराया या रूट बताने भर की मराठी बोल भी लेते हैं। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि इसे अनिवार्य बनाकर लाइसेंस रद्द करने और 3 महीने के निलंबन जैसी कड़ी सजा का डर दिखाना सरासर अनुचित है।

ड्राइवरों का कहना है कि ऑटो या टैक्सी चलाना कोई उच्च प्रशासनिक पद नहीं है, बल्कि यह एक दिहाड़ी मजदूरी जैसा काम है जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। यदि किसी गरीब ड्राइवर का लाइसेंस 3 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया, तो उसके बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया और बुजुर्गों की दवाइयों का खर्च रुक जाएगा। चालकों की मांग है कि सरकार को दंडात्मक रुख अपनाने के बजाय प्रोत्साहन और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर देना चाहिए।

"70 से 80% सवारी खुद बोलती है हिंदी": ड्राइवरों का व्यावहारिक तर्क

मुंबई के चालकों ने इस नियम के व्यावहारिक पहलू पर भी अपनी बात रखी है। अंधेरी और बांद्रा में ऑटो चलाने वाले ड्राइवरों का कहना है कि मुंबई एक अंतरराष्ट्रीय महानगर (Cosmopolitan City) है, जहां देश और दुनिया भर से लोग आते हैं। रोजमर्रा के सफर के दौरान लगभग 70 से 80 प्रतिशत यात्री खुद ही हिंदी या अंग्रेजी में बातचीत की शुरुआत करते हैं।

ड्राइवरों के मुताबिक, कई बार स्थानीय मराठी भाषी यात्री भी रास्ता बताने, टर्न लेने या फ्लाईओवर का उपयोग करने के निर्देश हिंदी में ही देते हैं। चालकों का कहना है कि "अगर यात्री हमसे लगातार मराठी में बात करेंगे, तो हम बहुत तेजी से और आसानी से सीख जाएंगे। भाषा संवाद का जरिया है, इसे किसी पर जबरन थोपने के बजाय आपसी बातचीत से बढ़ावा दिया जाना चाहिए।"

आरटीओ में लंबी कतारें और दिहाड़ी का नुकसान: ट्रेनिंग सेंटर की जमीनी हकीकत

परिवहन विभाग द्वारा मुंबई सेंट्रल, ताड़देव, वडाला और अंधेरी आरटीओ (RTO) में ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का विशेष प्रशिक्षण और सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन जमीनी स्तर पर ड्राइवरों को कई प्रशासनिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चालकों का आरोप है कि आरटीओ कार्यालयों में लंबी कतारों, सर्वर की दिक्कतों और प्रक्रियाओं में देरी के कारण उन्हें पूरे दिन लाइन में खड़ा रहना पड़ता है।

एक ड्राइवर ने बताया कि ट्रेनिंग क्लास में शामिल होने और सर्टिफिकेट हासिल करने के चक्कर में उनके दो से तीन दिन का काम छूट जाता है। ईंधन (CNG) की महंगाई और गाड़ी की ईएमआई (EMI) के बीच बिना कमाई के दिन बिताना उनके लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ रहा है। ऑटो यूनियनों ने मांग की है कि इन प्रशिक्षण शिविरों को आरटीओ दफ्तरों के बजाय गैस स्टेशनों, ऑटो स्टैंड्स या स्थानीय स्तर पर मोबाइल वैन के जरिए आयोजित किया जाए ताकि ड्राइवरों का काम प्रभावित न हो।

सरकार का रुख और ट्रेनिंग प्रोग्राम: क्या बोले परिवहन मंत्री?

राज्य सरकार का कहना है कि इस पूरे अभियान का उद्देश्य किसी की रोजी-रोटी छीनना या चालकों को परेशान करना नहीं है, बल्कि गैर-मराठी भाषी चालकों की पहचान कर उन्हें बुनियादी रूप से प्रशिक्षित करना है। परिवहन विभाग विभिन्न साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से 105 दिनों का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 1.10 लाख से अधिक गैर-मराठी भाषी वाणिज्यिक चालक यह प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, सरकार चालकों को सीखने का पूरा अवसर और साधन दे रही है। 17 अगस्त को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा उन सैकड़ों चालकों को विशेष प्रमाण पत्र भी वितरित किए जाएंगे जिन्होंने मराठी भाषा का बुनियादी कोर्स पूरा कर लिया है। सरकार का मानना है कि स्थानीय भाषा का ज्ञान होने से चालकों और यात्रियों के बीच गलतफहमियां दूर होंगी और पर्यटन तथा परिवहन सेवाओं में सुधार होगा।

स्थानीय अस्मिता बनाम आजीविका: क्या निकलेगा बीच का रास्ता?

महाराष्ट्र में मराठी भाषा का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील और भावनात्मक रहा है। जहां एक ओर स्थानीय भाषा और अस्मिता के संरक्षण के लिए इस कदम को जरूरी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के विभिन्न राज्यों से आकर मुंबई में मेहनत-मजदूरी करने वाले प्रवासी चालकों की आजीविका की सुरक्षा भी एक बड़ा मानवीय पहलू है।

ऑटो-टैक्सी यूनियनें अब सरकार से अपील कर रही हैं कि 15 अगस्त की समयसीमा बीतने के बाद भी किसी भी चालक पर दंडात्मक कार्रवाई या लाइसेंस जब्ती की शुरुआत तुरंत न की जाए। इसके बजाय एक लचीली व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें सड़क पर काम करने वाले ड्राइवरों को धीरे-धीरे सीखने का अवसर मिले ताकि बिना किसी टकराव के भाषाई सौहार्द और रोजगार दोनों सुरक्षित रह सकें।

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