INSAT-3DS Satellite: आ गया मॉनसून, फिर क्यों तरस रही दिल्ली-यूपी? सैटेलाइट तस्वीरों से खुला उत्तर भारत में सूखा रहने का बड़ा राज

INSAT-3DS Satellite: आ गया मॉनसून, फिर क्यों तरस रही दिल्ली-यूपी? सैटेलाइट तस्वीरों से खुला उत्तर भारत में सूखा रहने का बड़ा राज

उत्तर भारत के करोड़ों लोग इस समय एक बेहद अजीब स्थिति का सामना कर रहे हैं। कैलेंडर के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (South-West Monsoon) धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए उत्तर भारत की दहलीज को पार कर चुका है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग अब भी झमाझम बारिश के लिए आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं। आमतौर पर जून के आखिरी हफ्ते में जिन इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन जाते थे, वहां इस बार लोग उमस और सूखी गर्मी से बेहाल हैं।

ऐसे में हर किसी के मन में यही बड़ा सवाल उठ रहा है कि जब मौसम विभाग कह रहा है कि मॉनसून पहुंच चुका है, तो फिर बादलों की यह बेरुखी क्यों? इस रहस्य से पर्दा उठाया है भारत के सबसे आधुनिक मौसम सैटेलाइट INSAT-3DS की ताजा तस्वीरों ने, जिसने उत्तर भारत में बारिश न होने की असली और वैज्ञानिक वजह को पूरी दुनिया के सामने ला दिया है।

मॉनसून का आना और बारिश होना; दोनों में है जमीन-आसमान का अंतर

मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी क्षेत्र में मॉनसून की आधिकारिक एंट्री हो जाना और वहां लगातार मूसलाधार बारिश होना, दोनों पूरी तरह से अलग-अलग बातें हैं। आईएमडी (IMD) के नियमों के अनुसार, मॉनसून की रफ्तार और उसका बरसना कई जटिल मौसमी कारकों पर निर्भर करता है, जिसमें हवाओं का रुख, वायुमंडल में मौजूद नमी का स्तर और एक बहुत बड़े भूभाग पर लगातार होने वाली प्री-मॉनसून गतिविधि शामिल हैं।

यही वजह है कि जब मॉनसून किसी राज्य में प्रवेश करता है, तो यह जरूरी नहीं कि उसके हर जिले और शहर में एक साथ पानी बरसे। कई बार मॉनसून की हवाएं किसी इलाके के ऊपर से गुजर तो जाती हैं, लेकिन वहां का स्थानीय मौसम कई दिनों तक पूरी तरह सूखा, तपता और उमस भरा बना रहता है।

INSAT-3DS सैटेलाइट की तस्वीरें क्या कह रही हैं?

भारत के एडवांस्ड मौसम उपग्रह INSAT-3DS द्वारा अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों ने उत्तर और मध्य भारत के बीच के इस भारी अंतर को साफ कर दिया है। सैटेलाइट डेटा से पता चलता है कि देश इस समय दो अलग-अलग मौसमी हिस्सों में बंटा हुआ है:

क्षेत्र (Regions) सैटेलाइट में बादलों की स्थिति (Cloud Cover Status) मौसम का मिजाज
मध्य व दक्षिण भारत घने, गहरे और सक्रिय मानसूनी बादलों का जमावड़ा लगातार और अच्छी बारिश
बंगाल की खाड़ी व पूर्वोत्तर भारी नमी वाले बादलों का मजबूत चक्रवात मूसलाधार बारिश का दौर
दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा आसमान पूरी तरह से साफ या बेहद छिटपुट बादल भीषण उमस और सूखी गर्मी
राजस्थान व पश्चिमी यूपी बादलों की अनुपस्थिति, शुष्क हवाएं तेज धूप और लू का असर

आखिर उत्तर भारत में क्यों अटकी है बारिश? ये है असली वैज्ञानिक वजह

INSAT-3DS की तस्वीरों और मौसम विज्ञानियों के विश्लेषण के मुताबिक, उत्तर भारत में व्यापक बारिश न होने के पीछे सबसे बड़ा विलेन 'लो-प्रेशर सिस्टम' (कम दबाव का क्षेत्र) का सक्रिय न होना है।

कम दबाव के क्षेत्र का महत्व: सामान्य तौर पर, जब मॉनसून आगे बढ़ता है, तो बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक बहुत ही मजबूत कम दबाव का क्षेत्र बनता है। यह सिस्टम एक विशाल वैक्यूम क्लीनर की तरह काम करता है, जो समुद्र से भारी मात्रा में नमी खींचकर उसे देश के अंदरूनी मैदानी इलाकों (मध्य और उत्तर भारत) की तरफ धकेलता है। जब यह नमी पहाड़ों और स्थानीय हवाओं से टकराती है, तो झमाझम बारिश होती है।

वर्तमान में, बंगाल की खाड़ी के ऊपर ऐसा कोई मजबूत कम दबाव का क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया है। इसके चलते समुद्र से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाएं उत्तर भारत के मैदानों तक पहुंचते-पहुंचते बेहद कमजोर और शुष्क हो जा रही हैं। यही कारण है कि दिल्ली-यूपी में लगातार और व्यापक रूप से पानी बरसने के बजाय, केवल कुछ गिने-चुने इलाकों में ही हल्की आंधी, गरज-चमक या बेहद छिटपुट बौछारें गिरकर शांत हो जा रही हैं।

जुलाई की शुरुआत में बदलेगा मौसम, फिर से रफ्तार पकड़ेगा मॉनसून

दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के वासियों को इस उमस भरी गर्मी से ज्यादा दिनों तक परेशान नहीं होना पड़ेगा। मौसम विभाग के ताजा अनुमानों के मुताबिक, जुलाई के शुरुआती हफ्ते में मॉनसून का यह सुस्त पड़ा सिस्टम एक बार फिर से बेहद आक्रामक और सक्रिय होने जा रहा है।

भूमध्य रेखा के उत्तर में, पूर्वी हिंद महासागर के ऊपर इस समय एक बहुत बड़ा और शक्तिशाली मौसम तंत्र (Weather System) तेजी से विकसित हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 4 से 7 दिनों के भीतर यह सिस्टम बंगाल की खाड़ी में प्रवेश कर जाएगा। इसके वहां पहुंचते ही समुद्र के ऊपर एक नया और बेहद गहरा कम दबाव का क्षेत्र बनेगा, जो उत्तर भारत की तरफ नमी वाली हवाओं की एक बड़ी खेप भेजेगा।

इसके साथ ही, वैज्ञानिक पश्चिमी भारत (महाराष्ट्र और गुजरात) के ऊपर बनने वाले एक और विशेष चक्रवाती सिस्टम पर भी नजर रख रहे हैं। इन दोनों सिस्टम्स के एक साथ एक्टिव होते ही जुलाई की शुरुआत के साथ ही दिल्ली, यूपी, पंजाब और हरियाणा में मानसूनी बारिश का असली और धमाकेदार दौर शुरू हो जाएगा, जिससे तापमान में भारी गिरावट आएगी और लोगों को इस उमस से पूरी तरह राहत मिल जाएगी।

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