चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी करने वालों की खैर नहीं! आसमान से 'ड्रोन' रख रहे नजर, RPF के एक्शन से अपराधियों में खलबली
आसमान से नजर, जमीन पर एक्शन: रेलवे का नया सुरक्षा चक्र देश भर में चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की बढ़ती घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया था, लेकिन अब रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने इसके खिलाफ 'डिजिटल कवच' तैयार कर लिया है। अब ट्रेनें सिर्फ पटरियों पर ही नहीं दौड़ रहीं, बल्कि उन पर आसमान से ड्रोन की नजर भी है। सीनियर डिविजनल सिक्योरिटी कमिश्नर आशुतोष पांडे के अनुसार, संवेदनशील इलाकों में ड्रोन की तैनाती ने न केवल अपराधों को कम किया है, बल्कि अपराधियों को रंगे हाथों पकड़ने में भी बड़ी सफलता दिलाई है। ड्रोन के जरिए की जा रही रियल-टाइम निगरानी से पत्थरबाजों के लिए छिपना नामुमकिन हो गया है।
आंकड़ों में दिखा बदलाव: गिरफ्तारी दर में 146% की भारी उछाल RPF के ताजा आंकड़े इस नई रणनीति की कामयाबी की कहानी कह रहे हैं। साल 2025 की तुलना में 2026 में पत्थरबाजी की घटनाओं में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि अपराधियों की धरपकड़ में 146% की ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है। खासकर आदर्श नगर-नरेला-पानीपत जैसे अति-संवेदनशील सेक्शन में ड्रोन का इस्तेमाल गेम चेंजर साबित हुआ है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि के दिखते ही तत्काल एक्शन टीम को अलर्ट कर दिया जाता है, जिससे अपराधी मौके से भागने में नाकाम रहते हैं।
शराबी या शरारती? कौन है इन वारदातों के पीछे? जांच में यह बात सामने आई है कि कई वारदातों के पीछे रेलवे ट्रैक के पास रहने वाले बच्चे हैं। अधिकारी बताते हैं कि जागरूकता और शिक्षा की कमी के कारण ये बच्चे अनजाने में या शरारत के तौर पर पत्थर फेंकते हैं, जो यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। रेलवे ने ऐसे मामलों में बच्चों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उन्हें सुधारने और जागरूक करने पर जोर दिया है। हालांकि, जानबूझकर अपराध करने वाले तत्वों के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई जारी है। रेलवे की इस दोहरी रणनीति—एक तरफ आधुनिक तकनीक से निगरानी और दूसरी तरफ सामाजिक जागरूकता—ने ट्रेनों को पहले से अधिक सुरक्षित बना दिया है।