ड्रैगन की घेराबंदी! चीन से त्रस्त देशों के साथ भारत ने चली 'एक तीर से दो शिकार' की महासामरिक चाल, पीएम मोदी का मास्टरस्ट्रोक

ड्रैगन की घेराबंदी! चीन से त्रस्त देशों के साथ भारत ने चली 'एक तीर से दो शिकार' की महासामरिक चाल, पीएम मोदी का मास्टरस्ट्रोक

हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में चीन की लगातार बढ़ती दादागीरी और आक्रामक विस्तारवादी नीतियों को नेस्तनाबूद करने के लिए भारत ने एक बेहद आक्रामक और अभूतपूर्व दोहरी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। नई दिल्ली में बैठे रणनीतिकारों ने साफ कर दिया है कि चीन को उसकी औकात दिखाने के लिए भारत अब सिर्फ बहुपक्षीय मंचों पर निर्भर नहीं रहेगा। भारत एक तरफ जहां क्वाड (Quad) और आसियान (ASEAN) जैसे शक्तिशाली वैश्विक समूहों के जरिए बीजिंग की अंतरराष्ट्रीय घेराबंदी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ हिंद महासागर के प्रमुख द्वीपीय और तटीय देशों के साथ अपने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को इतनी तेजी से मजबूत कर रहा है कि ड्रैगन के लिए संभलना मुश्किल हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विमानों की तैनाती, संयुक्त रक्षा अनुसंधान, नवाचार और अत्याधुनिक रक्षा उपक्रमों को लेकर हुए समझौतों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का पूरा समीकरण ही बदल कर रख दिया है।

अमेरिका के बदलते रुख के बीच सिर्फ क्वाड पर निर्भरता खत्म, भारत की नई स्वतंत्र नीति

अंतरराष्ट्रीय मामलों के सैन्य विशेषज्ञों और वरिष्ठ राजनयिकों का मानना है कि भारत का यह नया रुख भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत दूरदर्शी है। हाल के दिनों में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के आंतरिक राजनीतिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं में आए बड़े बदलावों के कारण क्वाड संगठन जमीनी स्तर पर उतना आक्रामक या सक्रिय नजर नहीं आया है जितना उसे होना चाहिए था। ऐसे नाजुक मोड़ पर भारत ने साफ कर दिया कि वह चीन की चुनौती से निपटने के लिए किसी बाहरी महाशक्ति के भरोसे हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठेगा। भारत की 'एक तीर से दो शिकार' करने की यह नई नीति न केवल हिंद महासागर में अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को अचूक बना रही है, बल्कि बीजिंग के कर्ज जाल और सैन्य धौंस से डरे हुए देशों को एक बेहद मजबूत और विश्वसनीय विकल्प भी प्रदान कर रही है।

कर्ज जाल में फंसे देशों को भारत का सहारा, रक्षा सौदों से चीन के पाले में जाने का रास्ता बंद

भारत इस नई रक्षा कूटनीति के तहत विशेष रूप से उन महासगरीय देशों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है जो या तो चीनी घुसपैठ से बेहद परेशान हैं या फिर उसकी विस्तारवादी नीतियों का शिकार होकर भारी आर्थिक नुकसान उठा चुके हैं। इस कड़ी में सबसे बड़ा उदाहरण श्रीलंका का है, जहां भारत ने हाल ही में एक रणनीतिक रक्षा उत्पादन कारखाने का पूर्ण अधिग्रहण करके बीजिंग के सामरिक मंसूबों पर पानी फेर दिया है। इसके साथ ही, भारत ने इंडोनेशिया के साथ रक्षा सहयोग को एक नए शिखर पर पहुंचाते हुए वहां के रणनीतिक सबांग पोर्ट (Sabang Port) के विकास की कमान संभाल ली है, जिससे मलक्का जलडमरूमध्य पर भारत की सीधी नजर रहेगी। इसके अलावा, इंडोनेशिया को भारत की स्वदेशी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र मिसाइल देने का सैद्धांतिक फैसला चीन के नौसैनिक आधिपत्य के दावों के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।

सिंगापुर से सेशेल्स तक मजबूत हुआ भारत का सैन्य कवच, वैश्विक बाजार में बढ़ा स्वदेशी हथियारों का दबदबा

भारत की यह आक्रामक रक्षा नीति केवल बड़े देशों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हिंद महासागर के हर उस कोने तक पहुंच रही है जहां चीन अपनी नौसेना की मौजूदगी बढ़ाना चाहता था। सिंगापुर के साथ भारत ने न केवल सैन्य मोर्चे पर बल्कि रक्षा औद्योगिक क्षेत्र के बीच भी सहयोग को नए आयाम दिए हैं। वहीं रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीपीय देश सेशेल्स (Seychelles) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार भारतीय रक्षा सलाहकारों की तत्काल नियुक्ति का ऐलान कर चीन के समुद्री सिल्क रूट प्रोजेक्ट की रीढ़ तोड़ दी है। इस पूरी रणनीति के जरिए भारत न केवल अपनी समुद्री सीमाओं को अभेद्य बना रहा है, बल्कि इन सभी देशों को अपने अत्याधुनिक मेक-इन-इंडिया रक्षा साजो-सामान और हथियार बेचकर खुद को एक बड़े वैश्विक डिफेंस एक्सपोर्टर के रूप में भी स्थापित कर रहा है, जो चीन के व्यापारिक एकाधिकार को सीधी चुनौती है

 

Latest Posts