सिद्धिविनायक मंदिर में दान चोरी का बड़ा खुलासा! 9 कर्मचारी गिरफ्तार होने के बाद गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति
विशेष रिपोर्टर, मुंबई (महाराष्ट्र): देश के सबसे धनी और प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में शुमार मुंबई के प्रभादेवी स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर (Siddhivinayak Temple) में दान पात्र से चढ़ावा चोरी होने के संगीन मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में भारी भूचाल ला दिया है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद कि मंदिर के दान पात्रों से पैसों की हेराफेरी की जा रही थी, पुलिस प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 9 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस पूरी घटना के सामने आने के बाद जहां भक्तों की आस्था को गहरा ठेस पहुंचा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य में राजनीतिक दल एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत के गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
यह पूरा विवाद तब सतह पर आया जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने एक सार्वजनिक मंच से मंदिर ट्रस्टियों द्वारा राज्य के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखी गई एक गोपनीय चिट्ठी का हवाला दिया। राज ठाकरे ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर के दान पात्र से हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये का चढ़ावा गायब या चोरी किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि मंदिर में रोजाना लाखों-करोड़ों श्रद्धालु बप्पा के दर्शन करने आते हैं, लेकिन सालों से चल रही इस वित्तीय गड़बड़ी के कारण मंदिर की वास्तविक आय को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। राज ठाकरे के इस बयान के बाद शिवसेना के दोनों धड़ों (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट) के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखे आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
दान पेटी में चोरी से लेकर ट्रस्टियों की चिट्ठी तक: जानिए क्या है सिद्धिविनायक मंदिर विवाद और इस पर किसकी क्या है राय?
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के वरिष्ठ नेता सदा सरवणकर ने पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करते हुए पुष्टि की कि मंदिर में अनियमितताओं और चोरी की आशंका मिलने पर गहन आंतरिक समीक्षा की गई थी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत 9 कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कराया गया है। सदा सरवणकर ने बताया कि कड़े निगरानी तंत्र और इन संदिग्ध कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद मंदिर की आय में अभूतपूर्व उछाल आया है। दो साल पहले तक जहां मंदिर की सालाना आय लगभग 114 करोड़ रुपये थी, वहीं इस समय यह बढ़कर 182 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है।
दूसरी ओर, इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) और सत्ताधारी महायुति गठबंधन के बीच कड़वाहट बढ़ गई है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने राज ठाकरे के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि जब से सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट का नियंत्रण एकनाथ शिंदे के करीबियों के हाथों में गया है, तब से मंदिर में दान चोरी की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। संजय राउत ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के संरक्षण में यह सब खेल चल रहा था और इसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि, सत्ता पक्ष और मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों ने उद्धव गुट के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रस्टी राहुल लोंढे ने स्पष्ट किया कि सिद्धिविनायक मंदिर में यह गड़बड़ी और कर्मचारियों का भ्रष्टाचार पिछले कई वर्षों से (उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री काल से) चला आ रहा था। जब महायुति के ट्रस्टियों ने मंदिर के कामकाज का वित्तीय ऑडिट (Audit) कराने की मांग की और रंगे हाथों जांच बैठाई, तब जाकर दशकों से काबिज इन कर्मचारियों की करतूत पकड़ी गई। ट्रस्टियों का कहना है कि चोरों के खिलाफ सख्त कदम उठाकर पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है।
राज ठाकरे ने अपनी सभा में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा था कि आरोपियों की गिरफ्तारी से पहले सिद्धिविनायक मंदिर में साप्ताहिक दान कलेक्शन 50 लाख रुपये से कम दिखाया जाता था, लेकिन कर्मचारियों के पकड़े जाने के ठीक तीन हफ्तों के भीतर यह साप्ताहिक आंकड़ा सीधे बढ़कर 1.5 करोड़ रुपये प्रति सप्ताह हो गया। इस भारी बढ़ोतरी से साफ जाहिर होता है कि हर हफ्ते लाखों रुपये सीधे कर्मचारियों की जेबों में जा रहे थे।
वर्तमान में पुलिस गिरफ्तार किए गए 9 कर्मचारियों के नेटवर्क और उनके पुराने रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस चोरी का पैसा किस-किस तक पहुंचता था। श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों ने मांग की है कि देवस्थानों के दान पात्रों पर सीसीटीवी निगरानी के साथ-साथ बायोमीट्रिक और डिजिटलाइज्ड काउंटिंग सिस्टम अनिवार्य किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी मंदिर की पवित्रता और चढ़ावे के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो सके।